For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सत्य की अवहेलना है : अरुन शर्मा 'अनन्त'

न्याय के घर झूठ भारी
सत्य की अवहेलना है,

अब पतन निश्चित वतन का,
दण्ड सबको झेलना है,

पाप का पापड़ कहाँ तक,
मौन रहकर बेलना है.

दांव पे साँसे लगी हैं,
ये जुआ भी खेलना है,

मृत्यु की खाई में बाकी,
शेष जीवन ठेलना है....

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 600

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 6:25pm

बढिया..

कोशिश के लिए हार्दिक बधाई...

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on November 19, 2013 at 11:03am

मृत्यु की खाई में बाकी,
शेष जीवन ठेलना है...

शायद! आज के समय में आँखों को चकाचौंध करते खोखलेपन का अंतिम सार यही है, रचना पर हृदय से बधाई स्वीकारें आदरणीय अरुण अनंत जी

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 18, 2013 at 4:52pm

अरुण जी ..सारगर्भित , जीवन का यथार्थ दर्शाती सुंदर रचना .तहे दिल बधाई स्वीकारें 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 4:47pm

हार्दिक आभार राजेश भाई जी

Comment by राजेश 'मृदु' on November 18, 2013 at 3:53pm

जय हो, संक्षिप्‍त एवं सुंदर प्रस्‍तुति बहुत अच्‍छी लगी, सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हृदयतल से हार्दिक आभार आदरणीय गुरुदेव श्री

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हार्दिक आभार आदरणीया गीतिका जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:54am

हार्दिक आभार अनुज राम जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:53am

बहुत बहुत शुर्क्रिया आदरणीया सरिता जी

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 18, 2013 at 11:53am

हार्दिक आभार आदरणीय चन्द्र शेखर भाई जी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post अनसुने अनकहे के बीच
"आ. भाई विजय जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post कुंडलिया. . . . झोला
"आ. भाई सुनील जी सुंदर कुंडलियां हुई हैं हार्दिक बधाई।"
Wednesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
Wednesday
sushil yadav posted blog posts
Oct 26
Sushil posted blog posts
Oct 26
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
Oct 26
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service