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१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ - हजज मुसम्मन सालिम

जहाँ से अब ज़रा चलने कि तैयारी करो बिस्मिल
वहम में जी लिए कितना कि बेदारी करो बिस्मिल

जमाने ने किसे रहने दिया है चैन से अब तक
पुरानी बात छोड़ो खुद को चिंगारी करो बिस्मिल

बुरा हो वक़्त कितना भी न घबराना कभी इस से
गया अब वक़्त गर्दिश का न दिल भारी करो बिस्मिल

ग़रीबों का दुखाना मत कभी भी दिल मेरे दोस्त
दुआ किसकी मिलेगी फिर जो ज़रदारी करो बिस्मिल

सवर जाये अगर इस से बुरा क्या है ज़रा सोंचो
कभी इस मुल्क की तुम भी तो सरदारी करो बिस्मिल

    ***(( अय्यूब खान "बिस्मिल"))***

मौलिक एवम अप्रकाशित 

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Comment by Ayub Khan "BismiL" on November 26, 2013 at 10:38pm

Shukria Nazir NazaR Bhai

Comment by nazir ahmad ansari(Nazir NAZAR) on November 21, 2013 at 10:46pm

वाह बिस्मिल भाई क्या कहने मुबारक 

Comment by Ayub Khan "BismiL" on November 21, 2013 at 10:12pm

Aapki Parkhi Nazar meri gazal pe huyi Ye bhi mere Liye badi baat hai Bhandari sahab ,, apse isi mohabbat ka Talib Rahunga janaab 

Comment by Ayub Khan "BismiL" on November 21, 2013 at 10:11pm

bahut shukria Saurabh Pandey sahab , Vijay Mishr Sahab 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 6:10pm

आप इस मंच के अन्य ग़ज़लकारों की प्रस्तुतियों को भी दखते रहें और मनन करें.

बहुत कुछ स्पष्ट होगा. बहरहाल बधाई स्वीकार करें.

Comment by विजय मिश्र on November 18, 2013 at 4:45pm
बहुत खूब लिखा जनाब , उम्दा अशआर ,शुक्रिया
Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 18, 2013 at 4:42pm

आदरणीय बिस्मिल जी ..सवर जाये अगर इस से बुरा क्या है ज़रा सोंचो 
कभी इस मुल्क की तुम भी तो सरदारी करो बिस्मिल...थोडा सा अर्थ समझने में मुझे भी दिक्कत आयी पर आपका समाधान पढने से स्पस्ट हो गया ..सादर 

Comment by राजेश 'मृदु' on November 18, 2013 at 3:48pm

हार्दिक बधाई इस सुंदर प्रस्‍तुति पर, सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 18, 2013 at 8:49am

बहुत ख़ूब ... वाह वा 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on November 17, 2013 at 9:17pm

आदरणीय , खान भाई , आपका शुक्रिया , अर्थ समझाने का , केवल उसी शे र को पढ के  समझना मेरे लिये मुश्किल हो रहा था !!!!

कृपया ध्यान दे...

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