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उसकी बातों पे मुझे आज यकीं कुछ कम है
ये अलग है कि वो चर्चे में नहीं कुछ कम है

जबसे दो चार नए पंख लगे हैं उगने
तबसे कहता है कि ये सारी ज़मीं कुछ कम है

मैं ये कहता हूँ कि तुम गौर से देखो तो सही
जो जियादा है जहां वो ही वहीँ कुछ कम है

मुल्क तो दूर की बात अपने ही घर में देखो
'कहीं कुछ चीज जियादा है कहीं कुछ कम है'

देख कर जलवा ए रुख आज वही दंग हुए
जो थे कहते तेरा महबूब हसीं कुछ कम है

कुछ तो अनबन है ज़रूर उसकी, खुदा से 'राणा'
आज सजदे में झुकी उसकी ज़बीं कुछ कम है

मौलिक तथा अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on November 13, 2013 at 7:42am
वीनस भाई ग़ज़ल पसंद करने के लिए शुक्रिया|
Comment by vandana on November 13, 2013 at 6:45am

वाह !!! सर बहुत खूब 

मैं ये कहता हूँ कि तुम गौर से देखो तो सही
जो जियादा है जहां वो ही वहीँ कुछ कम है

मुल्क तो दूर की बात अपने ही घर में देखो 
'कहीं कुछ चीज जियादा है कहीं कुछ कम है'

कुछ तो अनबन है ज़रूर उसकी, खुदा से 'राणा'

आज सजदे में झुकी उसकी ज़बीं कुछ कम है

Comment by Nilesh Shevgaonkar on November 10, 2013 at 10:45pm

बहुत ख़ूब .. बधाई 

Comment by vijay nikore on November 10, 2013 at 2:26pm

इस खूबसूरत गज़ल के लिए बधाई, आदरणीय राणा प्रताप जी।

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 10, 2013 at 12:11pm

आदरणीय राणाप्रताप जी इस सुंदर ग़ज़ल के इस शेर के लिए बिशेष रूप से बधाई स्वीकारें 

मैं ये कहता हूँ कि तुम गौर से देखो तो सही
जो जियादा है जहां वो ही वहीँ कुछ कम है..सादर बधाअयीए के साथ 

Comment by savitamishra on November 9, 2013 at 4:10pm

bahut khubsurat

Comment by annapurna bajpai on November 9, 2013 at 2:02pm

वाह !! आ0 राणा प्रताप जी सुंदर गजल , बहुत बधाई आपको । 

Comment by अरुन 'अनन्त' on November 9, 2013 at 1:24pm

आदरणीय राणा भाई जी वाह अत्यंत सुन्दर बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने सभी अशआर बेहद पसंद दिली दाद कुबूल फरमाएं.

Comment by Sushil.Joshi on November 9, 2013 at 1:11pm

वाह वाह... बहुत जानदार गज़ल कही है आ0 राणा प्रताप जी....हार्दिक बधाई...... एक एक शेर बेहद खूबसूरत है......


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 8, 2013 at 8:51pm

जबसे दो चार नए पंख लगे हैं उगने 

तबसे कहता है कि ये सारी ज़मीं कुछ कम है...............नया नया उड़ने वालों का मिजाज़, बहुत सुन्दर 

मैं ये कहता हूँ कि तुम गौर से देखो तो सही
जो जियादा है जहां वो ही वहीँ कुछ कम है................. बहुत गहराई में उतर ये भाव चुन कर शेर में ढाले हैं ..बहुत खूब!

हार्दिक बधाई इस गहन अर्थ संजोती सुन्दर ग़ज़ल पर 

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