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आख़िरी पड़ाव:दीपक पांडेय

तिमिर में जो दीप्ति अवलोकित अंतिम वही ठिकाना
पथ खोजने पड़ेंगे खुद को, नही चलेगा कोई बहाना
कलेवर की पीर भूलकर लक्ष्य प्राप्ति की करों कामना
कर्म को तुम समझो गुरुवर, वेदनाओं को पाहूना

अंगीकार हो जहाँ पर सुख कहलाए वो आशियाना
मानव की काया नश्वर चरित्र ही असली गहना
रण की सफलता दिखलाए हर अराति को आईना
विजय प्राप्त मैं करता जाऊं सभी की यही तमन्ना

थकी भुजाएँ, लक्ष्य ओझल फिर भी अदम्य पराक्रम
अंकुश रहे चित्त पर यद्यपि प्रदर्शित धैर्य व संयम
नैतिकता की राह कठिन किंतु यही सर्वोत्तम
कहलाओगे विश्वविजेता सफलता चूमेंगी तुम्हारे कदम


दीपक पांडेय
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 759

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Comment by वेदिका on October 18, 2013 at 5:10pm

बढ़िया प्रयास !!

Comment by coontee mukerji on October 18, 2013 at 1:18pm

बहुत सुंदर.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 17, 2013 at 11:53pm

वाह .. उत्तम !

Comment by वीनस केसरी on October 17, 2013 at 9:45pm

सुंदर प्रस्तुति

Comment by बृजेश नीरज on October 17, 2013 at 6:14pm

विचारों को शब्द देने का अच्छा प्रयास है! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 17, 2013 at 12:53am

सुंदर सकारात्मक भाव, बहुत बहुत बधाई आदरणीय दीपक जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on October 16, 2013 at 11:24pm

आदरणीय दीपक जी, सकारात्मक विचार लिये सुंदर रचना हेतु बधाई. तत्सम शब्दों के साथ आईना, आशियाना, तमन्ना जैसे शब्दों का प्रयोग  न जाने क्यों आत्मसात नहीं कर पा रहा हूँ.

Comment by Sushil.Joshi on October 16, 2013 at 9:09pm

बहुत सुंदर एवं प्रभाव छोड़ती हुई रचना है आदरणीय दीपक भाई.... इसके लिए बधाई..... केवल निम्नलिखित दो शब्दों के अर्थ समझने में अभी तक नाकाम हूँ.... कृपया मार्गदर्शन कीजिएगा....

पाहूना     -    कर्म को तुम समझो गुरुवर, वेदनाओं को पाहूना

अराति    -    रण की सफलता दिखलाए हर अराति को आईना


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 16, 2013 at 7:07pm

आदरणीय दीपक भाई , सुन्दर भावों से सजी और जीवन पथ मे मार्ग दर्शन करती आपकी रचना के लिये आपको हार्दिक बधाई !!!!

Comment by annapurna bajpai on October 16, 2013 at 6:56pm

थकी भुजाएँ, लक्ष्य ओझल फिर भी अदम्य पराक्रम
अंकुश रहे चित्त पर यद्यपि प्रदर्शित धैर्य व संयम
नैतिकता की राह कठिन किंतु यही सर्वोत्तम......................... सुंदर पंक्तियाँ , बहुत बधाई आपको । 

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