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ग़ज़ल:मुजरिम मैं नहीं,पर मुफ़लिसी..........

मुजरिम मैं नहीं पर मुफ़लिसी गोयाई छीन लेती है
दौलत आज भी इन्साफ की बीनाई छीन लेती है

हैं जौहर आज भी मुझ में वही तेवर भी हैं लेकिन
सियासत अब मेरे हाथों से रोशनाई छीन लेती है

नफरत थक गयी दामन मेरा मैला न कर पाई
मोहब्बत मेरे दामन से हर रुसवाई छीन लेती है

यही रहज़न कभी रहबर हुआ करता था बस्ती का
ग़रीबी रंग में आती है तो अच्छाई छीन लेती है


~सालिम शेख
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by saalim sheikh on September 20, 2013 at 2:51pm

धन्यवाद आदरणीय सौरभ जी,मेरा सौभाग्य है की आप को मेरा एक भी शेर पसंद आया, जी मैं पूरी कोशिश कर रहा हूँ की ओबीओ जैसे उत्तम मंच से कुछ हासिल कर सकूँ,ग़ज़ल के बारे में काफ़ी कुछ यहाँ जानने को मिला, और बहुत कुछ रोज़ सीख रहा हूँ,मैं बहुत अभारी हूँ इस मंच का और आप सभी गुरुजनों का,आदरणीय कृपा बने रखें

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 19, 2013 at 11:08am

आखिरी द्विपदी तो बहुत कुछ कह गयी भाई.. दिल से बधाई कह रहा हूँ.

शुभचिंतकों के सुझावों पर आप गंभीरता से अमल कर रहे हैं यह संतोष की बात है.

Comment by saalim sheikh on September 18, 2013 at 3:14pm

आदरणीय विजय निकोर जी सराहना के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by saalim sheikh on September 18, 2013 at 3:12pm

आ0  vijayashree जी बहुत बहुत धन्यवाद

Comment by saalim sheikh on September 18, 2013 at 3:12pm

जी बेशक आदरणीय ललित कुमार जी मैं भी गज़ल ही की तरफ क़दम बढ़ाना चाहता हूँ बस आप गुरुजनों का मार्गदर्शन और सहयोग मिल जाए तो ये रास्ता भी आसान हो जायगा 

Comment by vijay nikore on September 18, 2013 at 1:13pm

सभी शेर खूबसूरत हैं। बधाई।

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by vijayashree on September 18, 2013 at 12:45pm

नफरत थक गयी दामन मेरा मैला न कर पाई 
मोहब्बत मेरे दामन से हर रुसवाई छीन लेती है

बहुत खूब सलीम शेख़ जी 

Comment by Dr Lalit Kumar Singh on September 18, 2013 at 6:01am

आपकी आँखों में अब वो सजल होना चाहती है
आपकी आजाद कविता ग़ज़ल होना चाहती है

Comment by saalim sheikh on September 17, 2013 at 1:32pm

आ0  जितेन्द्र 'गीत'  जी बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by saalim sheikh on September 17, 2013 at 1:31pm

आदरणीय Abhinav Arun जी सराहना एवं मार्गदर्शन के लिए तहे दिल से शुक्रिया 

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