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कब तलक लोगों को लूटते जाओगे ,

वो दिन कब आएगा जब पछताओगे !

जिनकी दुआओं से राजा बन बैठे हो ,

उनकी ही नज़र से एक दिन गिर जाओगे !

मंदिर मज़्जिद के नाम पे खूब लूटा ,

एक दिन वहां भी दरवाज़ा बंद पाओगे !

रूह भी छोड़ देगी इस गंदे जिस्म को ,

फिर इस जिस्म को लेकर कहाँ जाओगे!

सिकंदर भी ना ले जा पाया जहाँ से 

खाली हाँथ आये थे खाली हाँथ जाओगे !!

राम शिरोमणि पाठक"दीपक "
मौलिक व् अप्रकाशित

Views: 495

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Comment by ram shiromani pathak on September 3, 2013 at 8:46pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीया मंजरी पाण्डेय जी,स्नेह यूँ ही बनाए रखें  //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on September 3, 2013 at 8:46pm

बहुत  बहुत  आभार  आदरणीय सुरेन्द्र  कुमार शुक्ल जी,स्नेह यूँ ही बनाए रखें  //सादर 

Comment by mrs manjari pandey on August 25, 2013 at 3:09pm

   आदरणीय शिरोमणि पाठक जी प्रस्तुति पर बधाई

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 23, 2013 at 10:57pm

रूह भी छोड़ देगी इस गंदे जिस्म को ,

फिर इस जिस्म को लेकर कहाँ जाओगे!

प्रिय शिरोमणि जी ..आइना और दीपक दिखाती चेतावनी देती अच्छी रचना काश लोगों की आँखें अब भी खुलें
भ्रमर ५

Comment by ram shiromani pathak on August 22, 2013 at 9:10pm

हार्दिक  आभार आदरणीय अरुण शर्मा जी,अमूल्य सुझाव के लिए बहुत आभारी हूँ  आपका  //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 22, 2013 at 9:09pm

हार्दिक  आभार आदरणीय जीतेन्द्र  जी //सादर 

Comment by ram shiromani pathak on August 22, 2013 at 9:08pm

हार्दिक  आभार आदरणीय गिरिराज  जी //सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 22, 2013 at 11:32am

बेहद सुन्दर नज्म अनुज किन्तु थोड़ी कसावट की कमी प्रतीत हो रही है. बहरहाल प्रस्तुति पर बधाई स्वीकारें.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 21, 2013 at 4:47pm

सुंदर रचना अभिव्यक्ति , बधाई राम भाई जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 21, 2013 at 11:31am

वर्तमान को बयां करती एक अच्छी नज़्म् !

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