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बहुत याद क्यों आज तू आ रही है ?

बहुत याद क्यों आज तू आ रही है ?


किसी ढीठ बच्ची सी नादानियों में
क्यों सुधियों के पन्नों को छितरा रही है ।

सुबह एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया
मेरे गाल पर फूल बिखरा गई थी ।
फुदकती हुई एक नन्हीं गिलहरी
थोड़ी देर गोदी में सुस्ता गई थी ।
अभी तक छुअन रेशमी-रेशमी सी
मेरे नर्म अहसास सहला रही है ।

मेरे सूने कमरे में कुछ देर खेलें
बुलाया था चंचल हवाओं को मैंने
मचलती चली आयें किलकारियाँ सब
कि खोला था मन की गुफाओं को मैंने
वो किलकारियाँ वो हवायें नहीं अब
मगर उनकी खुश्बू तो लहरा रही है ।

ये तनहाइयों और वो बातें, वो यादें
लगी मन में सावन की अब तक झड़ी है
जहाँ से बिछड़ कर अलग हो गये हम
वहीं तू दिया ले के अब तक खड़ी है -
सदा दे रही है, दुआ कर रही है
मगर पास आने से कतरा रही है।

..................... सुलभ

मौलिक एवं अप्रकाशित

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 27, 2013 at 12:26am

आदरणीय सुलभजी, क्षमा कि इस रचना पर विलम्ब से आ पारहा हूँ.

सामान्य और वहीवहीपन सेभरे बिम्बों को आपने बेहतर आयाम और भाव दिये हैं.

दूसरा बंद हृदय को हिलोर गया.

सादर बधाइयाँ.

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 21, 2013 at 11:38pm

मेरे सूने कमरे में कुछ देर खेलें
बुलाया था चंचल हवाओं को मैंने
मचलती चली आयें किलकारियाँ सब
कि खोला था मन की गुफाओं को मैंने

प्रिय सुलभ जी ...खूबसूरत भाव ..मनमोहक शब्द बन्ध ....आनंद आ गया

..भाई बहन का प्रेम अमर रहे ...रक्षा बंधन की शुभ कामनाएं
भ्रमर ५

Comment by vijay nikore on August 21, 2013 at 7:16am

//बहुत याद क्यों आज तू आ रही है ?//

इस एक पंक्ति ने ही आज बहुत कुछ कह दिया है।

अच्छी रचना के लिए बधाई।

 

इस रचना से मुझको अपनी एक कविता याद आ गई...

"तुम जब भी आती हो, इतना दर्द बन कर क्यूँ आती हो?"

 

सादर,

विजय निकोर

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on August 21, 2013 at 3:43am

"सुबह एक छोटी सी प्यारी सी गुड़िया
मेरे गाल पर फूल बिखरा गई थी ।
फुदकती हुई एक नन्हीं गिलहरी
थोड़ी देर गोदी में सुस्ता गई थी ।"............बहुत सुंदर भाव, बड़ी ही खुबसूरती से पिरोय हुए

बेहद खुबसूरत रचना पर बधाई स्वीकारें आदरणीय सुलभ जी

Comment by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 5:21pm

बहुत-बहुत धन्यवाद ! अमन कुमार जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 5:20pm

बहुत-बहुत धन्यवाद ! श्याम नारायन वर्मा जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 5:20pm

बहुत-बहुत धन्यवाद ! राम शिरोमणि पाठक जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 5:19pm

बहुत-बहुत धन्यवाद ! गीतिका वेदिका जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on August 20, 2013 at 5:18pm

बहुत-बहुत धन्यवाद ! गिरिराज भण्डारी जी !

Comment by aman kumar on August 20, 2013 at 3:51pm

लगी मन में सावन की अब तक झड़ी है|

किसी गाने की याद दिला रही है ......

पूरी रचना दिल तक गयी है ...

कृपया ध्यान दे...

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