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एक सुनहरी आभा सी छायी थी मन पर

मैं भी निकला चाँद सितारे टांके तन पर

इतने में ही आँधी आयी, सब फूस उड़ा

सब पत्ते, फूल, कली, पेड़ों से झड़ा, उड़ा

धूल उड़ी, तन पर, मन पर गहरी वह छाई

मन अकुलाया, व्याकुल हो आँखें भर आई

सरपट भागें इधर उधर गुबार के घोड़े

जैसे चित के बेलगाम से अंधे घोड़े

कुछ न दिखता पार, यहाँ अब दृष्टि भहराई

कैसा अजब था खेल, थी कितनी गहराई

छप्पर, बाग, बगीचे, सब थे सहमे बिदके

मैं भी देखूँ इधर उधर सब ही थे दुबके

दौर थमा, धूल जमी, आभा वापस आई

लेकिन अब भी मन है, आँख नहीं खुल पाई

-        बृजेश नीरज

(मौलिक व अप्रकाशित)

 

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Comment by Rana Pratap Singh on August 3, 2013 at 9:55pm
अंतर्मन में अक्सर उठने वाली आंधी इस बार मुखर होकर आई है| बहुत बहुत बधाई| इस मंच पर इस विधा को लेकर एक लेख होना ही चाहिए| छंदों के समूह में आपकी तरफ से सोनेट पर एक लेख की अपेक्षा है|
Comment by बृजेश नीरज on August 2, 2013 at 5:36pm

आदरणीय लाडलीवाल जी आपका हार्दिक आभार! इसके विधान के लिए मेरे पूर्व के दो प्रयासों पर हुई चर्चा को देखें। कुछ जानकारी प्राप्त हो सकेगी। मैं भी अभी इसे सीख ही रहा हूं। सादर!

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:363376

http://www.openbooksonline.com/profiles/blogs/5170231:BlogPost:366344

Comment by बृजेश नीरज on August 2, 2013 at 5:32pm

आदरणीय अरुन भाई आपका हार्दिक आभार!

Comment by अरुन 'अनन्त' on August 2, 2013 at 2:47pm

आदरणीय बृजेश भाई जी बेहद ही गहन भाव लिए सुन्दर रचना हेतु हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 2, 2013 at 10:48am

रचना भुत सुन्दर लगी | ये पंक्तिया बहुत भा गयी -

दौर थमा, धूल जमी, आभा वापस आई

लेकिन अब भी मन है, आँख नहीं खुल पाई --- हार्दिक बधाई भाई श्री बृजेश जी | ये साँनेट कौनसी विधा है, जानकारी करावे 

Comment by बृजेश नीरज on August 1, 2013 at 11:28pm

आदरणीया महिमा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 1, 2013 at 11:28pm

आदरणीय आशुतोष जी आपका आभार!

Comment by बृजेश नीरज on August 1, 2013 at 11:27pm

आदरणीया अन्नपूर्णा जी आपका हार्दिक आभार!

Comment by MAHIMA SHREE on August 1, 2013 at 9:46pm

बहुत ही सुंदर भाव व् प्रस्तुति  आदरणीय ब्रिजेश जी बधाई

Comment by Dr Ashutosh Mishra on August 1, 2013 at 12:28pm

sunder bhav

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