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वो मै था .कि......

..वो मै था .कि......
जो सबके साथ चलना चाहता था ,
पर ये वो थे , अपने को मेरा सहारा समझ बेठे ,
वो मै था , जो प्यार को खुदा मानता रहा ,
पर ये वो थे की मेरे प्यार मे , लालच को तलाशते रहे,
वो मै था, सबसे छोटा बना हुआ था ,
पर ये वो थे सब अपने को बड़े बना बेठे ,
एक मै था कि घर अपना न बना पाया अभी तक
पर ये वो थे सब महल सजा बेठे ,
वो मै था कि बेठा रहा इंतजार मे मौत तक ,
पर ये वो थे कि मुड़ कर भी न देखा रहे गुजर मे ,

मौलिक एवं अप्रकाशित ,

Views: 638

Comment

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Comment by Shyam Narain Verma on May 29, 2013 at 4:34pm
बहुत सुन्दर...बधाई स्वीकार करें ………………
Comment by ram shiromani pathak on May 29, 2013 at 4:32pm

खूबसूरत रचना के लिए आदरणीय भाई साहब////////////

Comment by aman kumar on May 29, 2013 at 4:24pm

आदरणीय भाई साहब … तस्वीर के लिए कहा जा रहा है या रचना के लिए ………
बहुत खूबसूरत रचना साथ ही तस्वीर भी ........

Comment by Vindu Babu on May 29, 2013 at 3:55pm
सुन्दर भावाभ्यक्ति की है आपने आदरणीय अमन जी।
सादर बधाई स्वीकारें।
Comment by ram shiromani pathak on May 29, 2013 at 3:54pm

हुत सुन्दरबहुत सुन्दरबहुत सुन्दरबहुत सुन्दरबहुत सुन्दरबहुत सुन्दरबहुत सुन्दर///////////////

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