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वो जो पास होते कुछ ऐसा यार होता,  
बेताब दिल हमारा खुश बेशुमार होता. 
 
हम हाले-दिल सुनाते बेचैन निगाहों से, 
उनका भी कुछ अपना अंदाज़े-प्यार होता. 
 
एहसास जो हमें है उनको भी काश होता, 
उनको भी मेरी चाहत का इंतज़ार होता. 
 
उनको भी इल्म होता दीवानगी का मेरे, 
दीवानगी पे मेरे उनको खुमार होता. 
 
हम साथ-साथ चलते गिरते कभी संभलते , 
हमराह है मेरा वो मुझे ऐतबार होता. 
अमित कुमार दुबे.
मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by अमित वागर्थ on June 3, 2013 at 12:31am

ashok ji sadar dhanyavad

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 3, 2013 at 12:06am
एहसास जो हमें है उनको भी काश होता, 
उनको भी मेरी चाहत का इंतज़ार होता. ............वाह! बहुत सुन्दर.
Comment by अमित वागर्थ on May 30, 2013 at 10:35am

respected prachi ji evm respected kunti ji bahut-bahut dhanyavad

Comment by coontee mukerji on May 28, 2013 at 2:27pm

बहुत सुंदर दूबे जी , सादर/  कुंती


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 28, 2013 at 11:42am

सुन्दर गज़ल प्रयास आ० अमित दूबे जी 

शुभकामनाएँ 

Comment by अमित वागर्थ on May 27, 2013 at 8:27pm

neeraj ji apka bahut-bahut dhanyavad

Comment by Neeraj Nishchal on May 27, 2013 at 1:22pm

बहुत सुन्दर लाजवाब 

Comment by sanju shabdita on May 26, 2013 at 12:02am

respected amit ji wah, bahut khoob kaha hai aapne...

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