For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सभी अग्रजों एवं गुरुजनों को प्रणाम करते हुए यहां पहली बार गजल पोस्ट कर रहा हूं. उम्मीद है आप सबको पसन्द आयेगी.....


उठा दिल में धुआं सा है

पुराना प्यार जागा है,

कहो तो हम जवां हो लें
तुम्हारा क्या इरादा है

नसों में बिजलियां दौडें
मुहब्बत का तकाजा है

न जाने आज मौसम में
अजब सा क्यों नशा सा है 


वही तुम हो वही हम हैं
तो फिर क्यों फासला सा है 

न बिछड़े थे न बिछड़ेंगे
ये वादा था ये वादा है

चले आओ कि चर्चित का
यहाँ दिल कुछ रुका सा है

- VISHAAL CHARCHCHIT

Views: 591

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on November 1, 2012 at 2:12pm

दिल को एक खास सुकून मिला वीनस भाई कि ये गजल आपको पसन्द आयी......आपका तह- ए -दिल से शुक्र्गुजार हूं क्यॉकि आपकी गजल की तमाम पोस्ट से मुझे काफी चीजों के बारे में जानकारी हुई है.......!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on November 1, 2012 at 2:02pm

थैन्क यू सो मच सीमा दीदी......!!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on November 1, 2012 at 1:59pm

ये तो आपका स्नेह है भ्रमर भाई जी.......बहुत - बहुत शुक्रिया भाई जी !!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on November 1, 2012 at 1:53pm

आपका हृदय से आभारी हूं सौरभ सर.....!!!

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on November 1, 2012 at 12:53pm

शुक्रिया राणा प्रताप सिंह साहब !!!

Comment by वीनस केसरी on October 31, 2012 at 12:32am

वही तुम हो वही हम हैं
तो फिर क्यों फासला सा है


अहा अहा कैसा कचोटता हुआ शेअर है
वाह भाई
आप आये
आप छा गये
बधाई

Comment by seema agrawal on October 30, 2012 at 10:45pm

बहुत खूबसूरत सादगी से भरी  ग़ज़ल कही है विशाल भाई 

दिली मुबारकबाद 

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on October 30, 2012 at 8:59pm

उठा दिल में धुआं सा है
पुराना प्यार जागा है,

कहो तो हम जवां हो लें
तुम्हारा क्या इरादा है

विशाल जी छोटे छोटे बह्र ने गजब ढा दिया ..क्या बताऊँ की दिल को कितना .....ढेर सारा..... मजा आ गया..क्या बात है 

भ्रमर ५
 

 

 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 30, 2012 at 2:07pm

छोटे बह्र की एक अच्छी ग़ज़ल के लिये ढेर सारी बधाई विशाल चर्चित जी.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on October 30, 2012 at 10:12am

अच्छी गज़ल कही है यह शेर खास तौर पे पसंद आया 

नसों में बिजलियां दौडें
मुहब्बत का तकाजा है

हार्दिक बधाई|

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
yesterday
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
yesterday
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service