For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

जय श्रीकृष्ण देवकीनंदन | हूँ कर जोड़े, करता वंदन ||
दुख-विपदा से आप निवारो | मेरे बिगड़े काज सँवारो||
भगवन जग है तेरी माया | कण-कण तेरा रूप समाया ||
जगत नियंता, हे करुणाकर | तेरी ज्योति चंदा-दिवाकर ||
देवराज आरती उतारें | नारद जय-जयकार उचारें ||
तीनों लोकों में हो पूजा | नाथ तुम सम कौन है दूजा ||
दिवस अष्टमी भादो मासे | चमका कारागार कृपा से ||
हुए अवतरित जगत-कृपाला | पीले वसन, गले में माला ||
रूप चतुर्भुज, तेज दिखाया | माता के मन को अति भाया ||
माता ने विनती दुहराई | बन शिशु माँ की गोद सजाई ||
धर्महित एक काज बताया | पिता ने नन्द घर पहुँचाया ||
पले वहीं गिरधर गोपाला | बन के नन्द-यशोदा लाला ||
मटकी फोड़ी, माखन खाये | गोप-गोपियों को हर्षाये ||
तृणावर्त, शकटासुर मारे | केशी, बकासुर को संहारे ||
कालिय को भी मार भगाया | लोगों को भयमुक्त बनाया ||
सुरपति को अहं से उबारा | गोवर्धन उँगली पर धारा ||
बंसीवाला रास रचैया | चक्रधारी कृष्ण कन्हैया ||
दीन-हीन पर दया दिखाई | पापी कंस से मुक्ति दिलाई ||
मित्र सुदामा जो घर आये | प्रभु ने उनके भाग्य जगाये ||
शरणागत पर दया दिखाई | द्रुपदसुता की लाज बचाई ||
गीता ज्ञान अर्जुन को दिया | सदा ही धर्म का काम किया ||
राधे-राधे जो दुहराये | कभी भी भय न उसे सताये ||
जपे नाम राधेकृष्णा का | हो न दुख किसी मृगतृष्णा का ||

 

|| जय श्री राधेकृष्ण || जय श्री राधेकृष्ण || जय श्री राधेकृष्ण ||

Views: 869

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 14, 2012 at 9:38am
आदरणीय रक्ताले सर, आपका हार्दिक आभार...
Comment by Ashok Kumar Raktale on August 14, 2012 at 8:47am

गौरव जी

         बहुत सुन्दर भगवान श्री कृष्ण कि वन्दना. हार्दिक बधाई स्वीकारें.

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 14, 2012 at 6:40am

आदरणीय सुरेन्द्र जी........आपका हार्दिक आभार..........आपका कहना बिलकुल सही है, सौरभ सर ने अति उत्तम सुझाव दिये हैं | जय श्री राधे |

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 13, 2012 at 7:13pm
 प्रिय अजीतेंदु जी आप से पहले हम सौरभ भ्राता श्री को दाद देते हैं गुरुवर ने बहुत सुन्दर बनाया इस आप की भक्ति चालीसा को ....आप के प्रयास काविले तारीफ़ हैं मेहनत रंग लाती ही है ... बधाई ..
जय श्री राधे 
भ्रमर ५ 
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 11, 2012 at 4:48pm

जय कन्हैयालाल की मित्र संदीप पटेल जी....आभार...

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on August 11, 2012 at 1:54pm

जय जय कन्हैयालाल की जय बहुत सुन्दर वंदना की है आपने बधाई आपको

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 11, 2012 at 12:48pm
आदरणीय सौरभ पाण्डेय सर, आपका हार्दिक आभार। अति उत्तम सुझाव दिये हैं आपने। मुझे आपसे ऐसे ही मार्गदर्शन की अपेक्षा है। यही स्नेह बनाए रखिएगा...
Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on August 11, 2012 at 12:41pm
आदरणीया राजेश जी, आपका हार्दिक आभार...

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2012 at 10:16am

चौपाई छंद में लिखने का बहुत अच्छा प्रयास किया है आपने, भाई अजीतेन्दुजी.  हार्दिक बधाई.

सोलह की मात्रा का भरसक निर्वहन हुआ है लेकिन इसी के साथ पंक्तियों में शब्द संयोजन पर भी ध्यान देते रहें, गेयता समृद्ध होती है.

उदाहरणार्थ, -

जय श्रीकृष्ण देवकीनंदन | हूँ कर जोड़े, करता वंदन ||

जय श्रीकृष्ण देवकीनन्दन । मैं कर जोड़े करता वन्दन ॥

दुख-विपदा से आप निवारो | मेरे बिगड़े काज सँवारो||

दुख विपदा से आप निवारो । सगरे बिगड़े काज सँवारो ॥

जगत नियंता, हे करुणाकर | तेरी ज्योति चंदा-दिवाकर ||

जगत नियंता हे करुणाकर । ज्योति तिहारी चंद्र-दिवाकर ॥

देवराज आरती उतारें | नारद जय-जयकार उचारें ||

देव आरती स्वयं उतारें । नारद जयजयकार उचारें ॥

तीनों लोकों में हो पूजा | नाथ तुम सम कौन है दूजा ||

तीनों लोकों में हो पूजा । तुम सम नाथ कौन है दूजा ॥

हुए अवतरित जगत-कृपाला | पीले वसन, गले में माला ||

हुए अवतरित जगत-कृपाला । पीत वसन अरु कंठहिं माला ॥

धर्महित एक काज बताया | पिता ने नन्द घर पहुँचाया ||

धर्म साधता काज बताये । पिता नन्द के घर पहुँचाये ॥

........ 

........

इसी तरह का कुछ प्रयास पंक्तियों को सरस बनाता है. विश्वास है, मेरा साग्रह सुझाव सम्यक जान पड़ा होगा.

हार्दिक शुभकामनाएँ.. .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 11, 2012 at 9:51am

बहुत सुन्दर भक्ति रस से सराबोर वंदना बधाई आपको 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
9 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
11 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Saturday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service