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जिनके सर पर बाल नहीं है बाबाजी

सुर है लेकिन ताल नहीं है बाबाजी
पॉकेट  है पर माल नहीं है बाबाजी

क्योंकर कोई चूमे हमको सावन में
अपने चिकने गाल नहीं है बाबाजी

दर्पण से उनको नफ़रत हो जाती है
जिनके सर पर बाल नहीं है बाबाजी

मेहमानों की ख़ातिरदारी कैसे हो
घर में आटा दाल नहीं है बाबाजी

देश बेच कर खाने वाले लोगों का
लोहू शायद लाल नहीं है बाबाजी

उनकी ममता घुट घुट कर मर जाती है
जिनके अपने लाल नहीं है बाबाजी

मंहगाई के बिच्छू डंक चुभाते हैं
मोटी अपनी खाल नहीं है बाबाजी

हास्यकवि 'अलबेला' ऐसा घोड़ा है
जिसके खुर में नाल नहीं है बाबाजी

-अलबेला खत्री

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Comment

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Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 12:02pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी,
विनम्र प्रभाती प्रणाम
मान गया  दादा, आपने सही जगह कान पकड़ा है . अब कोई बहाना चलने वाला नहीं है. 

इस भूल के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ
वैसे कहना मत किसी से, ये भूल नहीं है . क्योंकि  अनजाने में नहीं हुई है, ये लापरवाही है  और भविष्य में ऐसी लापरवाही  न हो  इसका ख्याल रखूँगा .

अब कान तो छोड़ो.........उफ़.......दुखता है ...
सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 20, 2012 at 11:42am

बहुत अच्छा प्रयास हुआ है, भाई जी.  लेकिन एक बात साझा करना चाहता हूँ,  कि  है और हैं को एक साथ काफ़िये में लेकर नहीं चलते. आपका मतला है को लेकर चल रहा है तो कुछ अश’आर हैं क़ाफ़िया कैसे बना सकते हैं ?

सादर

Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 11:32am

बहुत बहुत धन्यवाद अरुण शर्मा जी
सादर

Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 11:31am

बहुत बहुत धन्यवाद संदीप जी
सादर

Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 11:29am

धन्यवाद भाई राजकुमार जी 
सादर

Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 11:28am

वाह वाह लक्ष्मण प्रसाद जी
बढ़िया जुगलबन्दी  निभाई ...हा हा हा
सादर

Comment by Albela Khatri on July 20, 2012 at 11:26am

धन्यवाद आदरणीय बागी जी,
कृपया लोहू  वाला दोष दूर कर दीजिये,,,,,,,,,मैं समझ नहीं पा रहा हूँ

सादर

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 20, 2012 at 11:11am

आदरणीय अलबेला जी क्या कहने आपके और बाबा जी के, दिल बाग़-बाग़ हो गया.

अलबेला जी लेकर फिर बाबा को आए हैं.
अलबेली बात कर हम सबका मन बहलाए हैं.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 20, 2012 at 9:31am

बेहद शानदार क्या बात है सर जी
हास्य की बौछार कर देते हैं आप सुबह सुबह
बहुत बहुत बधाई आपको

देश बेच कर खाने वाले लोगों का
लोहू शायद लाल नहीं है बाबाजी

दर्पण से उनको नफ़रत हो जाती है
जिनके सर पर बाल नहीं है बाबाजी

 

Comment by Raj Kumar Rohilla on July 20, 2012 at 9:29am

अलबेला भाई आज अच्छा  लगा पढ़ कर.

बधाई

कृपया ध्यान दे...

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