For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गज़ल - आदमी जो बेतुका है

वो अगर  मुझसे खफा है

हक है उसको क्या बुरा है

 

घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है

 

जो अपरिचित  है नदी से

बाढ़   पर  वो  बोलता  है

 

है   यकीं   चारागरी   पर

हो  जहर  तो  भी  दवा है

 

देख  कर  मुँह  फेर लेना

कुछ  पुराना   आशना  है

 

टूट  ही  जाना  है  उसको

सच  दिखाता  आइना  है

 

जी  रहा   तुकबंदियों  को 

आदमी   जो   बेतुका   है

 

 

..................... अरुन श्री !

Views: 831

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Arun Sri on July 19, 2012 at 7:54pm

डा. सूर्य बाली सर , आपके द्वारा उदृत शे'र मेरा भी पसंदीदा है ! सराहना हेतु धन्यवाद !

Comment by Arun Sri on July 19, 2012 at 7:53pm

राजेश कुमारी मैम , इस शे'र पर पूरे नंबर देने के लिए धन्यवाद ! अब ये भी बता दीजिए कि किस शे'र पर नंबर कटे हैं ! :-)) :-))
आपकी सराहना ने गौरवान्वित किया ! सादर !

Comment by Arun Sri on July 19, 2012 at 7:51pm

संदीप जी , गज़ल को मान देने के लिए धन्यवाद ! आप सब की यही हौसला अफजाई कुछ और बेहतर करने का जज्बा भर देती है मन में !


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 19, 2012 at 3:30pm

विश्वास से भरी इस ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाइयाँ.  अरसे बाद आपको सुनना बहुत अच्छा लग रहा है.  बहुत खूब. 

कुछ अश’आर तो एकदम से बाँध लेने वाले हैं.. .    सच कहूँ तो कई बार पढ़ गया आपकी यह ग़ज़ल.

बहुत-बहुत शुभकामनाएँ.

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on July 19, 2012 at 2:30pm

अरुण भाई नमस्कार ! अच्छी ग़ज़ल कही है

जो अपरिचित  है नदी से, बाढ़   पर  वो  बोलता  है...बहुत उम्दा शेर है।

दाद कुबूल करें !

Comment by Arun Sri on July 19, 2012 at 1:49pm

अरुन अनन्त साहब ! पसंदगी जाहिर करने के लिए शुक्रिया मित्र !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 19, 2012 at 1:16pm

बहुत सुन्दर अरुण जी 

घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है

 इन पंक्तियों पर तो पूरे नंबर 

 

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on July 19, 2012 at 12:59pm

वाह अरुण जी वाह! छोटी बह्र में क्या शानदार अश'आर कहे हैं आपने| दिल ख़ुश हो गया! ख़ास तौर पर ये दो शे'र बहुत ही पसंद आये|

घोंसले  के साथ  जुडकर

एक  तिनका  जी  रहा है ----> जीने के लिए एक वजह ही काफ़ी है.. :-)

टूट  ही  जाना  है  उसको

सच  दिखाता  आइना  है ---> कड़वी हक़ीक़त बयां कर दी आपने बहुत ख़ूब...

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 19, 2012 at 12:56pm

बेहद सुन्दर रचना अरुण जी , बधाई मित्र.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
17 hours ago
Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सुशील भाई  गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका आभार "
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय लक्ष्मण भाई , उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Monday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"विगत दो माह से डबलिन में हूं जहां समय साढ़े चार घंटा पीछे है। अन्यत्र व्यस्तताओं के कारण अभी अभी…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"प्रयास  अच्छा रहा, और बेहतर हो सकता था, ऐसा आदरणीय श्री तिलक  राज कपूर साहब  बता ही…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"अच्छा  प्रयास रहा आप का किन्तु कपूर साहब के विस्तृत इस्लाह के बाद  कुछ  कहने योग्य…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"सराहनीय प्रयास रहा आपका, मुझे ग़ज़ल अच्छी लगी, स्वाभाविक है, कपूर साहब की इस्लाह के बाद  और…"
Sunday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service