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कभी अपने नाखून देखे हैं
अपने अल्फाजों के नाखून
हाँ यही बहुत पैने हैं तीखे हैं
चुभते हैं
ज़रा तराश लो इन्हें
इनकी खरोंचों से चुभन होती है
ये विदीर्ण कर जाते हैं
मेरे मोम से कोमल ह्रदय को
बेकार ही इन्हें बढ़ाई जा रही हो
आखिर किसे भायेगा ये नखक्षेदन
इन्हें तराश लो
देखो इनका पैनापन सहने की क्षमता
मेरे मोम से ह्रदय में तो नहीं है
तराश लो न इन्हें
आखिर कब तक इन्हें चुभो चुभो के
मेरे मन को विदीर्ण करती रहोगी
तराश लो न इन्हें

"दीप"

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Comment

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Comment by आशीष यादव on July 14, 2012 at 10:42pm

वाह सर, एक बहुत अच्छी उपमा। यह प्रयोग वाकई काफी अच्छा लगा।
बधाई स्वीकारिये

Comment by Arun Sri on July 14, 2012 at 8:27pm

बढे हुए नाखून तो सुंदरता के लिए आवश्यक हैं उनकी नज़र में ! उन्हें कटवाएँगे तो वो आप ही को छोड़ जाएगी ! :-)) :-))

बहुत अच्छी कविता मित्र ! वास्तव में नाखून वाले शब्द आत्मा तक घायल कर जाते हैं ! बढ़िया प्रस्तुति !

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 14, 2012 at 11:38am

आदरणीय भ्रमर जी
मेरी इस कविता को आपका स्नेह प्राप्त हुआ
आपके प्रतिक्रिया के शब्द मुझे लिखने के लिए प्रेरित करते हैं
अपना ये असीम स्नेह यूँ ही बनाये रखिये
आपका सादर आभार

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on July 13, 2012 at 11:23pm

अपने अल्फाजों के नाखून 
हाँ यही बहुत पैने हैं तीखे हैं 
चुभते हैं 
ज़रा तराश लो इन्हें 
इनकी खरोंचों से चुभन होती है 
ये विदीर्ण कर जाते हैं 
मेरे मोम से कोमल ह्रदय को 

संदीप जी खूबसूरत ....बहुत अच्छा सन्देश देती रचना ..आइये तराश लें ..अपनी जिह्वा पर नियंत्रण रख ..

भ्रमर ५ 

 

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 5:56pm



Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 5:54pm

आदरणीय अलबेला सर जी
आपकी प्रतिक्रिया का प्रसाद मिला मुझे
मन प्रसन्न हो गया
चित्त में सुखद अनुभूति हुई है
आपका ये स्नेह यूँ ही अनवरत मुझ पर बनाये रखिये
आपका कोटि कोटि धन्यवाद सहित आभार

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 5:49pm

भाई संदीप पटेल दीप जी.......
बड़ी कोमलकान्त अभिव्यक्ति कर दी आपने........
हाय रे इस अदा पर कौन न मर मिटे........

आखिर कब तक इन्हें चुभो चुभो के
मेरे मन को विदीर्ण करती रहोगी
तराश लो न इन्हें

__बहुत सुन्दर काव्य,,,,,,,,,,,,बधाई मेरे भाई.....

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on July 13, 2012 at 5:42pm

आदरणीया डॉ साहिबा आपको लेखन पसंद आया
मेरा मनोबल बढ़ गया
अपना स्नेह यूँ ही  अनुज पर बनाये रखिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद और सादर आभार


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 13, 2012 at 4:32pm

बहुत सुन्दर सटीक बिम्ब... सुन्दर रचना के लिए बधाई आ. दीप जी

कृपया ध्यान दे...

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