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बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी

झूमो, नाचो, मौज मनाओ बाबाजी
जीवन का आनन्द उठाओ बाबाजी

ये क्या, जब देखो तब रोते रहते हो ?
घड़ी दो घड़ी तो मुस्काओ बाबाजी

मुझ जैसे मसखरे का चेला बन जाओ
दिवस रैन दुनिया को हँसाओ बाबाजी

ये सब नेता रक्तपिपासु कीड़े हैं
इनसे मत कुछ आस लगाओ बाबाजी

जनता के दुःख को जो अपना दुःख समझे
अब ऐसी सरकार बनाओ  बाबाजी

एक मिनट में ऐसी-तैसी कर देगी
बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी

ओ बी ओ की परिपाटी है 'अलबेला'
आपस में सब प्यार लुटाओ बाबाजी

-अलबेला खत्री 

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Comment

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 4:08pm

एक बात है घर में कहनी अलबेला,

मुस्काकर तो हमें रुलाओ बाबा जी 

क्या .... घर की याद दिला दी आदरणीय !!!

जय हो जय हो .......

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 3:52pm

हँसती ही है वो मेरी मूरखता पर
देखना हो तो घर पे आओ बाबाजी

____क्यों ठीक है न ठीक अम्बरीश जी  ?

Comment by Rekha Joshi on July 13, 2012 at 3:52pm

अलबेला जी ,

पल दो पल का जीवन है बाबा जी ,
हसी ख़ुशी में इसे  गुजारो बाबा जी |,प्यारी सी रचना पर हार्दिक बधाई 
Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 3:28pm

ही ही ही ही उन्हें हँसाओ तो जानें

हा हा हो हो की जय बोलो बाबा जी

स्वागत है आदरणीय अलबेला जी .....:-)

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 3:14pm


साधु साधु

वाह अम्बरीश जी.......
कमाल कर दिया आदरणीय
एक एक शब्द  को अर्थ में बदल दिया
बहुत  बहुत  धन्यवाद आपको
बहुत आभार आपको
जय हो !

______________अब क्या रह गया कहने को.....इत्ता बहुत है ...हा हा हा हा

Comment by Er. Ambarish Srivastava on July 13, 2012 at 3:03pm

//एक मिनट में ऐसी-तैसी कर देगी
बीवी को मत आँख दिखाओ बाबाजी//

बीबी जब भी आँख उठाये रे बाबा

चरण-कमल में शीश नवाओ बाबाजी

 

//ये सब नेता रक्तपिपासु कीड़े हैं
इनसे मत कुछ आस लगाओ बाबाजी//

रक्त पिपासु नेता को मत पालो तुम

पेस्टीसाइड इन्हें पिलाओ बाबाजी


जनता के दुःख को जो अपना दुःख समझे
अब ऐसी सरकार बनाओ  बाबाजी//

परचम अपना दुनिया में गर लहराना

मोदी सी सरकार बनाओ बाबाजी 

 

आदरणीय अलबेला जी .....

सुंदर सुंदर गजल कही है अलबेला

पढ़-पढ़ इसको मौज मनाओ बाबाजी  

बहुत-बहुत बधाई मित्रवर ...

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 11:36am

धन्यवाद  आदरणीय  डॉ सूर्य बाली 'सूरज' जी.......
बहुत बहुत शुक्रिया...

आपकी सराहना ने प्रफुल्लित किया

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on July 13, 2012 at 11:31am

अलबेला जी नमस्कार ! मतला बड़ा खूबसूरत कहा है आपने और बीबी वाला शेर तो मशाल्लाह लाजवाब है !! बहुत बहुत बधाई !!

Comment by Albela Khatri on July 13, 2012 at 11:24am

धन्यवाद  भाई अरुण शर्मा जी......
आभार !

Comment by अरुन 'अनन्त' on July 13, 2012 at 11:22am

वाह अलबेला जी.
आपकी रचना पढ़ कर मनो बल बढ़ता है. बहुत कुछ सीखने को मिलता है. बधाई

कृपया ध्यान दे...

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