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निर्मल मन मैला बदन , नन्हे नन्हे हाथ 
रोटी का कैसे जतन,समझ ना पाए बात (1) 

तरसे एक -एक कौर को ,भूखे कई हजार 
गोदामों में सड़ रहे, गेहूं के आबार (2) 

शून्य में देखते नयन , पूछ रहे है बात 
प्रजा तंत्र के नाम पर,क्यूँ करते हो घात (3) 

सीना क्यूँ फटता नहीं, भूखे को बिसराय 
हलधर का अपमान कर,धान्य, जल में बहाय (4) 

शासन की सौगात हो, या किस्मत की हार 
निर्धन को तो झेलनी, ये जीवन की मार (5) 

रंक का चूल्हा न जले, ना लकड़ी ना तेल 
मंत्रियों तक दौड रही ,सिलेंडरों की रेल (6) 

दिन हैं भ्रष्टाचार के,सत्य रहा है काँप 
मंहगाई की बीन   पे, नाच रहे हैं साँप  (7) 

बिगड़ी सूरत देश की ,किस के जल से धोय 
गंगा भी मैली करी,  बचा उपाय न कोय (8)

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 25, 2012 at 11:24am

 योगी सारस्वत जी मेरी रचना पसंद करने के लिए आभार 

Comment by Yogi Saraswat on June 25, 2012 at 11:00am

बिगड़ी सूरत देश की ,किस के जल से धोय
गंगा भी मैली करी, उपाय बचा न कोय

बिलकुल सटीक बात कही आदरणीय राजेश कुमारी जी ! हर चेहरा जब गन्दा हो और इतना गन्दा की उसे गंगा के जल से भी न साफ़ किया जा सके तब यही पंक्तियाँ सटीक लगती हैं !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 25, 2012 at 8:41am

अरुण कुमार जी आभार कहाँ मात्रा गणना में त्रुटी है इंगित करें तो एडिट कर लूँगी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 25, 2012 at 8:29am

आशीष यादव जी बहुत बहुत आभार 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on June 24, 2012 at 11:08pm

नौ दो ग्यारह हो गई , टंकी रातों रात

तेरह ग्यारह देखिये बन जायेगी बात |

Comment by आशीष यादव on June 24, 2012 at 1:42pm

बिल्कुल आज की दशा को विम्बित किया आपने।
बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 24, 2012 at 11:37am

हार्दिक आभार रेखा जी 

Comment by Rekha Joshi on June 24, 2012 at 11:25am

राजेश जी ,सादर ,

रंक का चूल्हा न जले, ना लकड़ी ना तेल 
मंत्रियों तक दौड रही ,सिलेंडरों की रेल ,हकीकत ब्यान करती हुई रचना पर बधाई ,

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 24, 2012 at 11:12am

सौरभ पाण्डेय जी आपकी प्रतिक्रिया बहुत मायने रखती है मेरे लिए आपका परामर्श ,प्रोत्साहन भरे शब्द सर आँखों पर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 24, 2012 at 11:09am

भावेश राज पाल जी मेरी रचना का इतना उत्कृष्ट विश्लेषण करने के लिए आपका हार्दिक आभार

कृपया ध्यान दे...

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