For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"न जाने क्यूँ किसी को खल रहा हूँ"

न  जाने  क्यूँ  किसी  को  खल  रहा  हूँ ,
मै  अपनी  रह  गुज़र  पर  चल  रहा  हूँ ....

दीया  हूँ  हौसलों का इसलिए मै ,
मुकाबिल  आँधियों  के  जल  रहा  हूँ ....

मै  तेरे  नाम  की  शोहरत  हूँ  शाएद ,
इसी  बयेस  सभी  को  खल  रहा  हूँ .....

मुझे  तू  याद  रखे  या  भुला  दे ,
मै  तेरी  याद  में  हर  पल  रहा  हूँ ....

उसी  ने  रिश्ता -ए -दिल  तोड़   डाला ,
मै  जिसके  वास्ते बे -कल  रहा  हूँ ....

खुदा  का  शुक्र  है  ''रिजवान '' अब  तक ,
मै  अपनी  जुस्तुजू  में  चल  रहा  हूँ .....



"रिजवान खैराबादी"

Views: 805

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Abhinav Arun on May 5, 2012 at 7:50pm

बहुत खूब रिजवान साहब शानदार पुर असर ग़ज़ल के हर शेर जानदार हैं बधाई !!

 

Comment by MOHD. RIZWAN (रिज़वान खैराबादी) on May 5, 2012 at 7:35pm

आप सभी का  शुक्रिया......

Comment by ASHFAQ ALI (Gulshan khairabadi) on May 5, 2012 at 7:26pm

वाह... रिजवान जी बहुत खूब


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 5, 2012 at 6:27pm

मोहतरम मो. रिज़वान साहब, अश’आर पर दिली दाद कुबूल फ़रमायें.

दीया  हूँ  हौसलों का इसलिए मै ,
मुकाबिल  आँधियों  के  जल  रहा  हूँ .... 

इस हिम्मत को सलाम

 

उसी  ने  रिश्ता -ए -दिल  तोड़   डाला ,
मै  जिसके  वास्ते बे -कल  रहा  हूँ ....       

इस शे’र को ज़िन्दग़ी मिले. इसकी तासीर पुरअसर है. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 5, 2012 at 5:05pm

वाह वाह वाह - मतले से मकते तक सभी अशआर बेहद खूबसूरत कहे हैं मोहम्मद रिजवान जी. ढेरों दाद हाज़िर है.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 5, 2012 at 4:43pm

दीया  हूँ  हौसलों का इसलिए मै ,
मुकाबिल  आँधियों  के  जल  रहा  हूँ ....

बहुत खूब . क्या बात कही आपने. बधाई. स्वागत भी आपका .
Comment by MAHIMA SHREE on May 5, 2012 at 2:46pm
न जाने क्यूँ किसी को खल रहा हूँ ,
मै अपनी रह गुज़र पर चल रहा हूँ ....
मन के भावो को व्यक्त करती खुबसूरत गज़ल के लए बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
12 hours ago
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
Tuesday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रामबली गुप्ता's blog post कर्मवीर
"कर्मवीरों के ऊपर आपकी छांदसिक अभिव्यक्ति का स्वागत है, आदरणीय रामबली गुप्त जी.  मनहरण…"
Tuesday
Jaihind Raipuri posted a blog post

ग़ज़ल

2122    1212    22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत मेंक्या से क्या हो गए महब्बत में मैं ख़यालों में आ गया उस…See More
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service