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छन्न पकैया .......

छन्न पकैया - छन्न पकैया, सूरज दावानल है.
सूख रहीं हैं नदियाँ सारी, सड़के रहीं पिघल हैं.
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया,जलता आलम सारा.
थर्मा-मीटर की नलिका में, ताव मारता पारा.
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया, बीसुर रही हरियाली.
मुरझाते फूलों के मुख से , हुई  नदारत लाली.
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया,लस्सी,कुल्फी,मठ्ठा,
तीनो मिलकर ना बैठा दें , ग्रीष्म-ऋतु का भठ्ठा.
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया, नभ फेंके अंगारें.
लू की लहरें दिखा रहीं हैं, सबको दिन में तारे!!
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया, गौरैया  बेहाल!
नल के ऊपर चोंच मारते, जीना हुआ मुहाल.
**
छन्न पकैया - छन्न पकैया, लोग ये आते-जाते.
गमछा लेकर सूर्य-कोप से, मुखड़ा  आज चुराते.
**
अविनाश बागडे...

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Comment by दुष्यंत सेवक on May 5, 2012 at 11:11am

हा हा हा हा .. जी ज़रूर, सौभाग्य होगा मेरा.. आऊंगा तो ज़रूर मिलूँगा सर

Comment by AVINASH S BAGDE on May 5, 2012 at 10:28am

Dr.Prachi Singh ....right mam.

दुष्यंत सेवक ....kabhi to nanihal aao...

MAHIMA SHREE ....meri khushkismati...

आशीष यादव ....aabhar bhai ji.

and

rajesh kumari mam..shukriya aap ko meri bat chhoo gai.



सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 4, 2012 at 6:25pm

वाह अविनाश जी छन्न पकैया के माध्यम से ग्रीष्म ऋतू का पूरा वर्णन कर डाला बहुत सुन्दर सामयिक छन्न पकैया

छन्न पकैया - छन्न पकैया,लस्सी,कुल्फी,मठ्ठा,

तीनो मिलकर ना बैठा दें , ग्रीष्म-ऋतु का भठ्ठा.
**vaah...vaah

 

Comment by आशीष यादव on May 4, 2012 at 6:05pm
वाह अविनाश सर, इस भीषण गर्मी के ताव को अपनी छन्न पकैया मे खूबसूरती से बताया। और हाँ ये भी बताया कि क्या तीन चीजेँ गर्मी से बचा सकती हैँ। बेहतरीन प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई।
Comment by MAHIMA SHREE on May 4, 2012 at 5:03pm
छन्न पकैया - छन्न पकैया,लस्सी,कुल्फी,मठ्ठा,
तीनो मिलकर ना बैठा दें , ग्रीष्म-ऋतु का भठ्ठा.

छन्न पकैया - छन्न पकैया, गौरैया बेहाल!
नल के ऊपर चोंच मारते, जीना हुआ मुहाल.
आदरणीय अविनाश जी ,
नमस्कार .. सर बहुत बढ़िया है आपका छन्न पकैया..
बधाई स्वीकार करे ..
Comment by दुष्यंत सेवक on May 4, 2012 at 4:06pm

यह छन् पकैया विदर्भ की भीषण गर्मी की उपज है जो आदरणीय बागडे साहब नागपुर में भोग रहे हैं .. खैर अच्छे छंद पकाए हैं सर नागपुर की गर्मी में :) 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 4, 2012 at 2:08pm

छन्न पकैया - छन्न पकैया, गौरैया बेहाल!

नल के ऊपर चोंच मारते, जीना हुआ मुहाल.

How wonderfully the status of ground water depletion is reflecting in these lines.

Best wishes respected Avinash Ji.

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