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 मैंने अपने अंदर बना डाले हैं

अजीब से दायरे 

अनेक बंधन 

अनेक विचार 

मैंने पाल रखे हैं

अजीब सी मान्यताएं 

अनेक नियम 

अनेक प्रथाएं

इनसे निकल नहीं  पाती

घुमती रहती हूँ उसी में

बाहर जा नहीं पाती

मैंने कही भी नहीं

खुले  रखे हैं दरवाजे

डाल रखे हैं दरवाजो पे

बड़े बड़े ताले

खो बैठी हूँ उनकी चाभियाँ

नहीं ढूंढने जाती हूँ उन्हें

सोच रखे हैं कई बहाने

बाहरी हवाएं नहीं आती

मौसम भी नहीं बदलते

सूरज की किरणें  भी

लौट जाती है टकराकर

दो पल खुश हो जाती हूँ

अपने इंतजामात पर

पर अगले पल ही छा जाता है

घनघोर अँधेरा

मुश्किल होता है

ये जानना

दिन है या रात हो गयी है

सच है या

है कोई मायाजाल 

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on May 3, 2012 at 2:58pm

अच्छी रचना है  | यह  तो मानव  स्वाभाव  है,

मानव कुच्छ धारणाए मन में रखता है, उनसे वह 

बहार नहीं निकल पाता, वर्ना वह इन्सान से महान,

महान से देव तुल्य बन जावे | इस आपने अपने भावो 

से यथार्थ चित्रित किया है |  सुंदर चित्र की लिए बधाई |   

Comment by MAHIMA SHREE on May 3, 2012 at 2:12pm
वीनस जी , नमस्कार , स्वागत है आपका ..
सच कहा आपने हम सभी अपने अपने मायाजाल में फंसे पड़े है ... चाहे वो छोटा हो या बड़ा ..
आपका हार्दिक धन्यवाद , आभारी हूँ आपने पढ़ा और सराहा /
Comment by MAHIMA SHREE on May 3, 2012 at 2:09pm
आदरणीय प्रदीप सर , सादर नमस्कार
सर आपका आशीर्वाद मिल रहा है तो ये प्रभु कृपा ही है ....
सबका स्नेह आशीष से मायाजाल टूट जायेगा एक दिन ..
आपका ह्रदय से धन्यवाद
Comment by वीनस केसरी on May 2, 2012 at 11:21pm

सुन्दर
अपनी सी लगती कविता
बधाई स्वीकारें ...


हर किसी के पास होता है
अपना एक माया जाल
हर कोई बनाता है
अपना एक संसार 
जिसकी जितनी सोच होती है
उसका संसार भी उतना ही बड़ा होता है
मेरा  संसार मुझे छोटा लगता है
बहुत छोटा
काश मैं कुछ नया सोच सकूं ...
जो बड़ा हो ...

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 2, 2012 at 2:24pm

स्नेही महिमा , सादर 

मन  की किवड़िया खोल, प्रभु  तेरे  द्वारे  खड़े . 
रूक जाना नहीं हिम्मत को हार के आयेंगे फिर दिन बहार के.
काश ये मायाजाल ही हो . 
बहुत  सुन्दर रचना. बधाई. 
Comment by Bhawesh Rajpal on May 2, 2012 at 4:46am

बहुत- बहुत  धन्यवाद  ! अब मेरी टिप्पणिया हिंदी में ही होंगी  !

Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2012 at 10:08pm

भावेश  जी नमस्कार , आपका स्वागत है , आपने सराहा , उत्साहवर्धन   किया , आपका ह्रदय से धन्यवाद

(जहा पे सारे obo के नियम लिखे हुए है ठीक उसके निचे आपको हिंदी में लिखने का लिंक दिया हुआ लिखा हुआ है देवनागरी (हिंदी ) टाइप करने हेतु यंहा क्लिक करे उसे क्लिक करते ही नया पेज विंडो ओपन होगा जहा आप हिंदी में लिख कर फिर कापी कर जहा पेस्ट करना है कर सकते है  )

Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2012 at 10:02pm

आशीष जी नमस्कार , आपका ह्रदय से धन्यवाद....

Comment by Bhawesh Rajpal on May 1, 2012 at 4:04pm

Respected Mahima shree Ji , Beautifully expressed boundations created by self.

Heartiest Greetings and Regards.

I am a new member and still trying to understand how to convert my comments in Hindi.

Can any one help me in this regard.

Comment by आशीष यादव on April 30, 2012 at 5:52pm

सुन्दर रचना। भावनाओं की सुन्दर अभिव्यक्ति।
बधाई

कृपया ध्यान दे...

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