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तनहा खड़ा 

एक पेड़ हूँ मैं 

बरसों पहले 

नन्हा सा प्यारा बच्चा

पास के जंगल से 

मोहित हो मेरे रूप पर 

अपनी नन्ही बाँहों में भर 

घर मुझे ले आया था 

कोमल हाथों से अपने 

आंगन में मुझे बसाया था 

सोते जागते उठते बैठते 

पास मेरे मंडराता था 

सुबह शाम पानी देकर 

मन ही मन इठलाता था 

बच्चे खेलें साथ मिलकर 

उनसे मुझे बचाता था 

आँगन उसका इतना बड़ा था 

जैसे होता माँ का दिल 

रह न जाऊं कहीं  अकेला 

नित नए पेड़ लगाता था 

 साथ -साथ हम बड़े हुए 

कई साथी मुझको दिए 

अपना घर परिवार बढाया 

जीवन के हर सुख-दुःख में 

अपना साझीदार बनाया 

कल चक्र से सब बंधे हुए 

समय बीता हम जुदा हुए 

वो आज नहीं है 

पर अभी हूँ मैं 

अकेले में खड़ा 

एक पेड़ हूँ मैं 

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 1:19pm

snehi arun ji, bhav samjhe. likhna safal hua. aap log safal lekhak hain. likhte rahiye. dhanyvad.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 1:17pm

snehi mahima ji , shubhashish. ye sab apki mehanat ka fal hai. badhai to aap logon ko meri taraf se.badhiya badhiya  likhen, yahan gyan prapt karen. aapka nam ho. dhanyavad.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 1:11pm

dhanyvad adarniya ashok ji sadar abhivadan ke sath. sneh banaye rakhiye.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 1:07pm

adarniya singh sahab ji, sadar abhivadan. apka sneh, samarthan abhar. rini rahunga ajivan. paid katne ko log aari par dhar rakh rahe hain. dhanyvad.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 2, 2012 at 1:01pm

aadarniya rajesh kumari ji, sadar abhivadan, sarahna hetu abhar, nachij ko sneh diye rahiye. dhanyvad.

Comment by Arun Sri on April 2, 2012 at 10:51am

वाह सर जी ! क्या लिखा है ! वाह वाह !
सचमुच , महानता के पीछे कभी कभी बहुत दर्द छुपा रहता है !

आपने समझा ! आपके कवि ह्रदय को प्रणाम !

Comment by MAHIMA SHREE on April 2, 2012 at 10:41am
आदरणीय सर .
सादर प्रणाम
सर्वप्रथम आपको महीने का सर्वाधिक सक्रिय सदस्य चुने जाने पर हार्दिक बधाई....
अच्छे लग रहे है सर...:))
वो आज नहीं है
पर अभी हूँ मैं
अकेले में खड़ा
एक पेड़ हूँ मैं ...
जीवन के यथार्थ की सुंदर अभिव्यक्ति.....आपको मेरी शुभकामनाये और बधाई...
Comment by Ashok Kumar Raktale on April 1, 2012 at 10:39pm

प्रदीप जी,
              साथ बिताये क्षणों की यादें ही साथ रह जाती है और रह जाता है बिछड़ने का गम. सुन्दर काव्य. बधाई.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 1, 2012 at 10:27pm
आप रहें हमेशा छाया बनकर,
पंछी को ललचायें माया बनकर!
नित नए पौधे निकलें  और बड़े हों,
आपके अगल बगल खड़े हों.
कभी न महसूस करें अकेला.
किसलिए है आखिर आपका यह चेला!
श्रद्धेय  कुशवाहा जी, आपको हार्दिक नमन!
रामनवमी के शुभ अवसर पर आपको मिले सम्मान पर मेरी हार्दिक शुभकामना!
जय श्री राम, जय पवन पुत्र हनुमान!
 

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 1, 2012 at 4:42pm

prakarti aur manav ka shareer aur aatma jaisa sambandh hota hai ...bahut sundar likha hai pradeep ji.

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