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(ओ.बी.ओ. का अपना बैज है. ये रचना ओ.बी.ओ. गीत हेतु तैयार की है.)

भटकता फिर रहा था न जाने कब से भीड़ में एक आस लिए 

मुट्ठी  भर  पा  जाऊं धरा औ  ज्ञान की एक  बूँद  का विश्वास  लिए 

मिली जानकारी जब  कि ओ.बी.ओ. एक ऐसा आधार है 

गुनी जनों के सानिध्य मिले तो अवश्य तेरा बेडा पार है

गजल  छन्द  और  कई  भाषाओँ   के हैं  विधान  यहाँ  ,

कहानी  और  कविता  का  मिलता  है ऐसा  ज्ञान कहाँ   

नए  पुराने  और  धर्म जाति का  न  कोई  भेद  यहाँ 

वो जगह बताएं  मिलता हो सबको  ऐसा  सम्मान  कहाँ  

ओ.बी.ओ. परिवार से पाया इतना  स्नेह और प्यार है 

न जाऊं कहीं और अब में   बैरागी मन हो गया रागी   

प्रीतम और  रवि  के अनोखे प्यार का  रोपा ये  पौधा है 

कामना खिला रहे  उपवन  सदा स्थापना  हेतु  बधाई  बागी 

आओ  सब  मिल  कर  अलख  जगाये  हम  

साहित्य  स्नेह  की  पावन गंगा  बहायें  हम  

कई भाषाओँ  और विधा में पारंगत गुरु विद्या दान करें 

माँ भारती , सरस्वती संग ओ.बी.ओ. का गुण गान करें. 

जय ओ.बी.ओ., जय हिंद , वन्दे मातरम् 

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 6:03pm

धन्यवाद समर्थन हेतु, आदरणीय उमा शंकर जी. सादर 

Comment by UMASHANKER MISHRA on May 31, 2012 at 10:22pm

बिलकुल सही

हमारा भी समर्थन है आपके साथ... कुशवाहा जी

जय ओ.बी.ओ.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 6, 2012 at 9:24pm

स्नेही अश्विनी, जी सादर,  भाव प्रकट किये. शिल्प नहीं आता.  ओ.बी.ओ. गीत भी देख लीजिये , इसी के ऊपर है. मेरा उत्साह बढेगा. धन्यवाद. 

Comment by अश्विनी कुमार on April 5, 2012 at 11:35pm

आदरणीय प्रदीप जी सादर अभिवादन ,,

गजल  छन्द  और  कई  भाषाओँ   के हैं  विधान  यहाँ  ,

कहानी  और  कविता  का  मिलता  है ऐसा  ज्ञान कहाँ  ,,,......सादर आपकी रचनाएँ खुद समग्रता की प्रतीक होती हैं अति सुंदर और सार्थक मंच के प्रति आपका हार्दिक उद्गार आपकी प्रतिबद्धता को उजागर कर रहा है  ......जय भारत

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 3:27pm

स्नेही वाहिद  जी, सादर 

आपने सराहा, प्रेरित हुआ. धन्यवाद,
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 5, 2012 at 2:32pm

बढ़िया प्रयास आदरणीय प्रदीप जी!

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 12:05pm

SNEHI MINU JI, PRASANN RAHEN, SUNDAR SUNDAR RACHNA BHEJEN. DHANYVAD.

Comment by minu jha on April 5, 2012 at 11:40am

बहुत सुंदर कुशवाहा जी

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 5, 2012 at 10:57am

AADARNIYA, SINGH SAHAB JI. SADAR ABHIVADAN.

मुझे नहीं लगता कि अन्यथा कुछ लिख कर आपका सम्मान करें!

जय ओ.बी.ओ., जय हिंद , वन्दे मातरम् 
SIR JI VICHAR THAY PRAKAT KAR DIYE. AAPNE SARAHA, PROTSAHIT KIYA. AUR KYA CHAIYE. ABHARI HOON AAPKA. 
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on April 5, 2012 at 7:16am

आओ  सब  मिल  कर  अलख  जगाये  हम  

साहित्य  स्नेह  की  पावन गंगा  बहायें  हम  

कई भाषाओँ  और विधा में पारंगत गुरु विद्या दान करें 

माँ भारती , सरस्वती संग ओ.बी.ओ. का गुण गान करें. 

जय ओ.बी.ओ., जय हिंद , वन्दे मातरम् 

आदरणीय कुशवाहा जी, सादर अभिवादन! मुझे नहीं लगता कि अन्यथा कुछ लिख कर आपका सम्मान करें!
जय ओ.बी.ओ., जय हिंद , वन्दे मातरम् 

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