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होली की शुभकामनाएं... (अनुष्टुप)

बज उठे नगाड़े हैं, फाग फगुन गा रहा |

सज गया पलासों से, कानन इठला रहा ||

 

रस भरे नज़ारे हैं, फूल महकते सभी,

भँवरे अकुलाए हैं, बाग उन्हें बुला रहा ||

 

गगन में गुलालों का, इंद्रधनुष भी खिला,

कारवां खुशहाली का, मंगलमय छा रहा ||

 

रंग बिरंग राहें भी, भूल बैर गले मिलीं,

भोर मगन वीणा ले, गीत गुनगुना रहा ||

 

मन मयूर नाचे है, झूम कर बसंत सा,

हबीब मस्त नैनों से, रंग है बरसा रहा ||

_____________________________

होली की सादर बधाईयां....

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Comment

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Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on March 12, 2012 at 5:02pm

सर्वादरनीय प्रदीप कुमार जी, राजेश कुमारी जी, वाहिद भाई, अभिनव भाई... उत्साह वर्धन के लिए सादर आभार.

स्नेह बना रहे. सादर...

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on March 12, 2012 at 5:00pm

सादर आभार सौरभ बड़े भईया... निवेदन कि आपका मार्गदर्शन अनुज को मिलता रहे...

सादर.

Comment by Abhinav Arun on March 11, 2012 at 3:59pm

क्या कहने श्री हबीब जी वाह प्रकृति और फागुन का अदभुत समन्वय !!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 10, 2012 at 7:20pm

मन मयूर नाचे है, झूम कर बसंत सा,

हबीब मस्त नैनों से, रंग है बरसा रहा

आदरणीय हबीब जी,

होली के अवसर पर लाजवाब प्रस्तुति| बधाई स्वीकार करें|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 9, 2012 at 5:41pm

वाह हबीब जी बेहतरीन अनुष्टुप 

गगन में गुलालों का, इंद्रधनुष भी खिला,

कारवां खुशहाली का, मंगलमय छा रहा ||

 vaah...


Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 9, 2012 at 4:32pm

sundar prastuti, badhai, shubh holi.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 9, 2012 at 2:47pm

छंद सभी निराले हैं, शिल्प-कथ्य सधे हुए   

संजय जो सुनाते हैं,  लगे, फागुन गा रहा ॥

बहुत-बहुत बधाई व होली की शुभकामनाएँ, संजय ’हबीब’ जी.

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