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ग़ज़ल नूर की- नहीं जो था होना वो सब हो रहा है

नहीं जो था होना वो सब हो रहा है
निज़ाम-ए-ख़ुदा में ग़ज़ब हो रहा है.
.
इबादत में कैसा शग़ब हो रहा है                  शग़ब- कोलाहल 
धड़क-कर ये दिल बे-अदब हो रहा है.
.
ज़रूरी नहीं कोई मक़सद हो अपना
बहुत कुछ यहाँ बे-सबब हो रहा है.
.
मेरी रूह ने रब को लिक्खी है चिट्ठी
लिखा है क़फ़स में ग़ज़ब हो रहा है.
.
बहुत चीखता था जो इक झूठ पहले
वो सच देख कर ख़ुश्क-लब हो रहा है.
.

निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 650

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Comment by Samar kabeer on May 18, 2023 at 4:54pm

जी, बहतर है ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 18, 2023 at 4:52pm

आ. समर सर,
आ. अशोक जी का फोन आया था, उन्हें सार्वजनिक रूप से इस्लाह करने में हिचकिचाहट थी. हालाँकि मैंने आग्रह भी किया कि यदि आप यहीं टिप्पणी करेंगे तो अन्य साथी भी लाभान्वित होंगे..
लेकिन अच्छी सलाह को मानना और उसे यथोचित सम्मान देना मेरा कर्तव्य जान कर मैंने यहाँ उनके नाम का ज़िक्र किया है. 
आज ऑफिस में व्यस्तता के चलते मिसरे तरमीम नहीं कर पा रहा हूँ, कल पेश करूँगा .
सादर 

Comment by Samar kabeer on May 18, 2023 at 4:47pm

//अशोक गोयल सर के सुझाव पर कुछ मिसरे तरमीम किए हैं जिन्हें//

जनाब अशोक गोयल साहिब के सुझाव तो कहीं नज़र नहीं आ रहे हैं?

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 18, 2023 at 4:02pm

आ. अशोक गोयल सर के सुझाव पर कुछ मिसरे तरमीम किए हैं जिन्हें कल पोस्ट कर सकूंगा।

आभार आ.गोयल सर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2023 at 6:16pm

धन्यवाद आ. सुरेन्द्र भाई जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2023 at 6:16pm

धन्यवाद आ. बृजेश जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 17, 2023 at 6:16pm

धन्यवाद आ. रचना जी 

Comment by नाथ सोनांचली on April 4, 2023 at 1:49pm

आद0 नीलेश नूर जी सादर अभिवादन। आपकी ग़ज़लें मुझे हमेशा प्रभावित करती हैं। बेहतरीन ग़ज़ल कही है आपने। बधाई

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 31, 2023 at 11:54am

अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय नीलेश जी...

Comment by Rachna Bhatia on March 8, 2023 at 8:25pm

आदरणीय निलेश 'नूर' जी बहुत ख़ूब ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

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