For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

221       1221       1221       122


ख़्वाबों को ज़रा आँख के पानी से निकालो
इन बुलबुलों को अश्क-फ़िशानी से निकालो

ईमान  की  कश्ती  पे  मुहब्बत  की  मसर्रत
इस कश्ती  को तूफ़ां की रवानी से निकालो

इस  रास्ते  पे  वस्ल   की  उम्मीद   नहीं  है
तरकीब   कोई   राह   पुरानी   से  निकालो

ग़ज़लों को रखो नफ़रती शोलों  से बचाकर
अश'आर  सभी लफ़्ज़ गिरानी से  निकालो

इक रोज़ गुज़र जाऊँगा ज्यूँ वक़्त  गुज़रता
भावों में रखो मुझको मआनी  से निकालो

ग़र  याद  उसे  करते  ही आ  जाते हैं आँसू
'ब्रज' इतना  बुरा है तो कहानी  से  निकालो

(मौलिक एवं अप्रकाशित)
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 669

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Chetan Prakash on September 13, 2022 at 4:16pm

आदाब, श्रद्धेय समर कबीर साहब, आपने इस नाचीज़ की टिप्पणी का संज्ञान लिया, आपका आभारी हूँ! वस्तुतः मेरा संकेत ऊला के संदर्भ में सानी में सुधार की अपेक्षा से था! कहना न होगा कि शे'र दोनों मिसरों का समन्वय है, और कुल कथन है, फिर एक ही स्टेटमेंन्ट दो बार conditional parts of speech, (शर्त सम्बंधित अव्यय 'गर', ऊला में, फिर सानी में 'तो' कैसे आ सकते है), इसको लेकर मैंने 'सानी में सुधार की गुंजाइश बताई थी! आशा है, आप मेरी बात से सहमत होंगे! 

मात्रा सम्बंधित मैंने कुछ नहीं कहा है, आप स्वयं देखें! 

सादर ! 

Comment by Samar kabeer on September 13, 2022 at 11:28am

 / हाँ मकते का सानी," ब्रज इतना बुरा है तो कहानी से निकालो", मेरी नज़र में सुधार चाहता है//

भाई चेतन प्रकाश जी इस मिसरे में 'ब्रज' का वज़्न 2 है, और कोई संशय हो तो विस्तार से बताएँ, सिर्फ़ इतना लिखना काफ़ी नहीं कि मिसरा सुधार चाहता है,क्यों सुधार चाहता है ये भी बताने का कष्ट करें ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 13, 2022 at 11:23am

आदरणीय अमीरुद्दीन जी ग़ज़ल की विस्तृत समीक्षा के लिए हार्दिक अभिनंदन करता हूँ...मतले के लिए आपका सुझाव बड़ा खूबसूरत है...गर और तो समानार्थी नहीं है शायद...गर मतलब यदि और यदि के साथ तो का इस्तेमाल कर सकते हैं...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 13, 2022 at 11:17am

आदरणीय चेतन प्रकाश जी ग़ज़ल पे आपकी शिरक़त और हौसलाफजाई के लिए सादर आभार...आपकी सलाह पे जरूर ध्यान दूँगा...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 13, 2022 at 9:53am

आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, बहुत प्यारी और ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है शे'र दर शे'र दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।

'ख़्वाबों को कभी आँख के पानी से निकालो'  इस मिसरे में 'कभी' की जगह 'ज़रा' कहने से रवानी और रब्त बढ़ जायेगा।

'गर याद उसे करते ही आ जाते हैं आँसू

'ब्रज' इतना बुरा है तो कहानी से निकालो'  इस शे'र में बोल्ड किये गये 'गर' और 'तो' शब्दों का अर्थ समान हैं, 'गर' के स्थान पर 'क्यों' किया जा सकता है। 

Comment by Chetan Prakash on September 13, 2022 at 7:20am

आदाब, जनाब 'ब्रज ', अच्छा प्रयास हुआ, इस बह्र में । हाँ मकते का सानी," ब्रज इतना बुरा है तो कहानी से निकालो", मेरी नज़र में सुधार चाहता है। शुभ प्रभात

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on September 12, 2022 at 5:06pm

आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार...ग़ज़ल में आपकी बारीक़ नजर को कोई अन्य भाषाई और व्याकरणीय त्रुटि नही मिली ये मेरे लिए उत्साह की बात है...इस खूबसूरत बह्र पे ये पहली ग़ज़ल लिख पाया हूँ...और आपका सुझाव 'उसे' के साथ मक़्ता और निखार पायेगा...सादर

Comment by Samar kabeer on September 12, 2022 at 4:20pm

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें I 

'ग़र  याद  मुझे  करते  ही आ  जाते हैं आँसू
'ब्रज' इतना  बुरा है तो कहानी  से  निकालो'--इस शे`र के ऊला में उचित लगे तो 'मुझे की जगह "उसे " कर लें I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
yesterday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Saturday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
Friday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service