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हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे. . . .

हिन्दी दिवस पर कुछ दोहे :

हिन्दी  अपने देश में, माँगे अपना मान ।
अंग्रेजी के ग्रहण से, धूमिल इसकी शान ।।

अंग्रेजी को देश में, इतना क्यों सम्मान ।
हिन्दी का अपमान तो, भारत का अपमान ।।

हिन्दी हिन्दुस्तान के, माथे का सरताज ।
हिन्दी तो है हिन्द के , जन-जन की आवाज ।।

हिन्दी से अच्छा नहीं, करना यूँ परहेज ।
अंग्रेजी के तेज को, हिन्द करे निस्तेज ।।

कण -कण में अब हिन्द के , हिन्दी गूँजे आज ।
नहीं चलेगा हिन्द में, अंग्रेजी का राज।।

सुशील सरना / 14-9-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

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Comment by Sushil Sarna on September 17, 2022 at 8:38pm
आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी
Comment by Sushil Sarna on September 17, 2022 at 8:37pm
आदरणीय समर कबीर जी आदाब, सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा और सुझाव का दिल से आभार आदरणीय
Comment by Sushil Sarna on September 17, 2022 at 8:36pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 15, 2022 at 6:09pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, हिन्दी दिवस के अवसर पर शानदार दोहे हुए हैं हार्दिक बधाई स्वीकार करें। 

Comment by Samar kabeer on September 15, 2022 at 4:09pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब, हिन्दी दिवस पर अच्छे दोहे रचे आपने, बधाई स्वीकार करें I 

'हिन्दी हिन्दुस्तान के, माथे का सरताज ।
हिन्दी तो है हिन्द के , जन-जन की आवाज '-- इस दोहे की तुकांतता मेरे नज़दीक ठीक नहीं क्योंकि 'ताज' शब्दश में 'ज'  के नीचे नुक़्ता नहीं है और 'आवाज़' शब्द में 'ज' के नीचे नुक़्ता है ,ग़ौर करें I

'हिन्दी से अच्छा नहीं, करना यूँ परहेज 
अंग्रेजी के तेज को, हिन्द करे निस्तेज'--- इस दोहे की तुकांतता ठीक नहीं है क्योंकि 'परहेज़' शब्द में 'ज' के नीचे नुक़्ता है और 'निस्तेज' शब्द में 'ज' के नीचे नुक़्ता नहीं है I 

  

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 15, 2022 at 10:03am

आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। हिंदी दिवस के संदर्भ में बेहतरीन दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई स्वीकारें।

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