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सिन्दूर कह न सिर्फ सजाने की चीज है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

सिन्दूर कह न सिर्फ सजाने की चीज है
पुरखे बता गये हैं निभाने की चीज है।।
*
इससे बँधा है जन्मों का रिश्ता जमाने में
हक और सिर्फ प्रीत से पाने की चीज है।।
*
भरते ही माग इससे जो विश्वास जागता
भूली जो पीढ़ी उसको बताने की चीज है।।
*
मन में जगाता प्रेम समर्पण के भाव को
केवल न रीत सोच  निभाने की चीज है।।
*
इससे हैं मिटाती दूरियाँ केवल न देह की
ये दो दिलों को पास में लाने की चीज है।।
*
छीनो न भाव इसका भले आधुनिक हुए
ये तो जमीर नर  का  जगाने की चीज है।।

*

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

Views: 316

Comment

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Comment by Samar kabeer on September 16, 2022 at 3:49pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, अच्छी रचना हुई है , बधाई स्वीकार करें I 

'ये दो दिलों को पास में लाने की चीज है'--- इस पंक्ति में 'पास' शब्द के साथ 'में' का प्रयोग उचित नहीं, इसे बदलने का प्रयास करें I 
*

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 10, 2022 at 8:31pm

आ. भाई सतविन्दर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार। 

मिटाती में टंकण त्रुटि है उसे मिटती पढ़े। इस ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद।

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on September 10, 2022 at 4:46pm

आदरणीय धामी सर सादर नमन,

सिंदूर पर केंद्रित अच्छे भाव उकेरे आपने हार्दिक बधाई।

इससे हैं मिटाती दूरियाँ  में कुछ अटकाव महसूस हो रहा है,  सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 29, 2022 at 10:37pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 23, 2022 at 2:47pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, सिंदूर की उपयोगिता और महत्व को बताती अच्छी कविता / नज़्म हुई है, बधाई स्वीकार करें। 

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