For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )

122 - 122 - 122 - 122

(भुजंगप्रयात छंद नियम एवं मात्रा भार पर आधारित ग़ज़ल का प्रयास) 

दिलों  में उमीदें  जगाने  चला हूँ 

बुझे दीपकों को जलाने चला हूँ 

कि सारा जहाँ देश होगा हमारा 

हदों के निशाँ मैं मिटाने चला हूँ 

हवा ही मुझे वो  पता  दे गयी है 

जहाँ आशियाना बसाने चला हूँ

चुभा ख़ार सा था निगाहों में तेरी 

तुझी से निगाहें  मिलाने चला हूँ

ख़तावार  हूँ  मैं  सभी दोष  मेरे 

दिलों  से ख़राशें  हटाने चला हूँ

"मौलिक व अप्रकाशित" 

Views: 2293

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 12, 2021 at 5:02pm

आदरणीय अमीरुद्दीन ’अमीर’ साहब, 

भुजंगप्रयात का नशा आप पर ऐसा तारी हुआ दीख रहा है कि आपने तो हमें चकित कर दिया है. यह सात्विक नशा है. इसका बने रहना अवश्य ही सारस्वत विकास का शुभ-कारण हो सकता है.

जय-जय. 

वैसे, इस ग़ज़ल को अरूज के लिहाज से न देखें यह संभव ही नहीं है.  सो, मतले को देखें - 

दिलों  में उमीदें  जगाने  चला हूँ 

बुझे दीपकों को जलाने चला हूँ  

’आने’ के काफिया पर ’जग’ और ’चल’ पूर्ण शब्द निर्धारित हो रहे हैं जो इता के ऐब या दोष का कारण बना रहे हैं.

यह अरूज का दोष होने से मानना तो होगा ही. अगर आपकी तरफ से कोई और ही सूरत बन रही हो तो कृपया साझा करें. 

बाकी, इस बढ़िया कोशिश के लिए दिली बधाइयाँ. 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 10, 2021 at 9:41am

बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय अमीरुद्दीन जी...

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 9, 2021 at 12:24pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु आभार।  सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 9, 2021 at 9:08am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 1, 2021 at 7:21pm

जनाब अमन सिन्हा जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और ज़र्रा नवाज़ी का तह-ए-दिल से शुक्रिया। आपकी टिप्पणी दिल छू गई।

ये सच है जनाब सीखना कभी ख़त्म नहीं होता, मैं भी एक तालिब-ए-इल्म हूँ और हमेशा रहूँगा। सादर। 

Comment by AMAN SINHA on October 1, 2021 at 11:28am

जनाब अमिरुद्दिन साहब, 

आप लोगोंं को पढ कर समझ मे आता है की अभी कितना कुछ सिखना मेरे लिये बाकी है और जरूरी भी है।

रचना बहुत अच्छी और दिल को छुने वाली लगी।  

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on September 30, 2021 at 7:17pm

मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद मसर्रत-बख़्श है, हौसला अफ़ज़ाई और इस्लाह के लिए मशकूर हूँ। जी सही फ़रमाया मतले में 'लाने' की क़ैद हो रही है, दुरुस्त करने की कोशिश करता हूँ, 'ख़ताएं मिरी थीं ख़तावार हूँ मैं' पर भी कुछ और सोचता हूँ। सादर। 

Comment by Samar kabeer on September 30, 2021 at 3:07pm

जनाब अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब, भुजंगप्रयात छंद आधारित ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें I 

'दिलोंको दिलोंसे मिलाने चला हूँ 

बुझे दीपकों को जलाने चला हूँ'

आपने ग़ज़ल में 'आने' क़वाफ़ी लिये हैं और मतले में 'लाने की क़ैद हप रही है देखिएगा I

'ख़ताएं मिरी थीं ख़तावार हूँ मैं'

इस मिसरे में आपने 'मेरी' शब्द को मात्रा पतन के साथ 'मिरी' लिखा है, छंद में इसकी इजज़त नहीं होती, मिसरा बदलने का प्रयास करें I  

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Tuesday
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service