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ग़ज़ल (कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम)

2122 - 1122 - 112

कब से बैठे हैं तेरे दर पे सनम

अब तो हो जाए महरबान करम......1

ग़ैर समझो न हमें यार सुनो

हम तुम्हारे हैं तुम्हारे ही थे हम....... 2

बात चाहे न मेरी मानो, सुनो! 

कीलें राहों में उगाओ न सनम....... 3

देके हमको भी अज़ीयत ये सुनो

दर्द तुमको भी तो होगा नहीं कम... 4

हम भी इन्सान हैं समझो तो ज़रा

देखो अच्छे नहीं इतने भी सितम....5

जिस्म से जान जुदा होती रहे

ग़म नहीं इश्क़ रहे निकले ये दम.....6

तुम ने काँटे जो बिछाए हैं यहाँ  

इसको गुलज़ार बना जाएंगे हम..... 7

दर्द जी भर के जो देना है वो दो 

हाँ मगर रहने दो थोड़ा सा भरम..... 8

हम पे नाफ़िज़ न करो हुक्म सियाह 

हक़ जो माँगा है वही दो न! परम!... 9 

हमने कब तुम से जहाँ माँग लिया

हठ जो कर बैठे हैं कर दो न करम.10

कब तलक तुमको मनाएंगे 'अमीर' 

तुम न मानोगे तो होंगे ख़फ़ा हम....11

''मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 20, 2021 at 5:23pm

आपके विशाल हृदय को सादर नमन करता हूँ, आदरणीय।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 20, 2021 at 10:25am

जनाब कृष मिश्रा साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद और तनक़ीद का तह-ए-दिल से शुक्रिया। जनाब मैं शुक्रगुज़ार हूँ कि मुझे ओ बी ओ के इस अज़ीम मंच पर आप जैसे सच्चे विश्लेषक और आलोचक मिले हैं जो मुझे और मेरे जैसे सीखने वालों को नया और बहतर करने की प्रेरणा देते हैं। मैं कोशिश करूंगा कि आइंदा आपकी अपेक्षानुरूप कुछ रचूं। अपनी नज़्र-ए-इनायत बनाए रखिएगा। सादर। 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on February 19, 2021 at 5:45pm

आ. अमीरुद्दीन अमीर सर इस रचना का कद आपके अनुरूप नहीं हुआ है हालाँकि लयात्मकता और गेयता के हिसाब से रचना में कमी नहीं है कथ्य में वह बात नहीं बनी है न ही नयापन दिख रहा। मैं वह कहने में विश्वास रखता हूँ जो मेरी समझ में कहना चाहिए दिखावे के कमेंट से दूर रहना पसंद करता हूँ आशा है आप मेरी भावना समझेंगें। सादर।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 16, 2021 at 12:44pm

जनाब आज़ी 'तमाम' साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से शुक्रिया।  सादर। 

Comment by Aazi Tamaam on February 16, 2021 at 11:39am

सादर प्रणाम जनाब अमीर जी

बेहतरीन ग़ज़ल है

बधाई स्वीकार करें

कृपया ध्यान दे...

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