For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल सँभालना है मुझे

2122/1212/22

1
साँप बनकर जो डस रहा है मुझे
दोस्त कह कर पुकारता है मुझे
2
उसका लहज़ा बता रहा है मुझे
अब न पहले सा चाहता है मुझे
3
दिल के चैन ओ सुकून की खातिर
ख़ुद को ख़ुद में ही ढूँढना है मुझे
4
हर घड़ी जिसको दिल में रखता हूँ
वो ही अंजान कह रहा है मुझे
5
क्यों पराया हुआ मैं अपनों में
यह सवाल अब भी सालता है मुझे
6
मय-कदे से उठा वो यह कह कर
घर भी 'निर्मल' सँभालना है मुझे

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 927

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rachna Bhatia on February 18, 2021 at 4:38pm

आदरणीया अमीरुद्दीन'अमीर'जी नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए आभार।

Comment by Rachna Bhatia on February 18, 2021 at 4:38pm

आदरणीय गुमनाम पिथौरागढ़ी जी, हौसला बढ़ाने के लिए आभार।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 16, 2021 at 5:37pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, उम्दा ग़ज़ल हुई है दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ, उस्ताद मुहतरम की इस्लाह पर ग़ौर कीजियेगा।  सादर।

Comment by gumnaam pithoragarhi on February 16, 2021 at 4:31pm

वाह बहुत खूब।, अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई।

Comment by Rachna Bhatia on February 14, 2021 at 8:15am

आदरणीय आज़ी तमाम जी नमस्कार। हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ।

Comment by Rachna Bhatia on February 14, 2021 at 8:14am

आदरणीय समर कबीर सर् सादर नमस्कार। सर् ग़ज़ल पर इस्लाह देने के लिए बेहद शुक्रिय:। सर्,अब यह ग़लती याद रहेगी।इसे फेयर में ठीक कर लेती हूँ।सादर।

Comment by Rachna Bhatia on February 14, 2021 at 8:12am

आदरणीय लक्ष्मण धामी'मुसाफ़िर'जी नमस्कार। भाई हौसला बढ़ाने के लिए आपकी आभारी हूँ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 13, 2021 at 9:03pm

आ. रचना बहन , सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा है । हार्दिक बधाई।

Comment by Samar kabeer on February 13, 2021 at 7:24pm

मुहतरमा रचना भाटिया जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

'दिल के चैन ओ सुकून की खातिर
ख़ुद को ख़ुद में ही ढूँढना है मुझे'

इस शैर के ऊला मिसरे में 'चैन' हिन्दी भाषा का शब्द है, इसलिये इज़ाफ़त का इस्तेमाल मुनासिब नहीं, पहले भी बताया जा चुका है, ऊला यूँ कह सकती हैं:-

'अपने दिल के सुकून की ख़ातिर

Comment by Samar kabeer on February 13, 2021 at 6:14pm

ग़लत कमेन्ट कर दिया ,क्षमा ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
18 hours ago
Sushil posted blog posts
18 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
18 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service