For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२२२/२२२२/२२२


हाथ पकड़ कर चाहा जिसका हो जाना
उसको भाया भीड़ का होकर खो जाना।१।
**
किस्मत किस्मत रटते सबको देखा पर
एक न पाया जिस ने किस्मत को जाना।२।
**
मीत  अकेलेपन  सा  कोई  और  नहीं
लेकिन ये भी सब  को पाया तो जाना।३।
**
नींद  न  आये  तो  ये  कैसे  भूलें  हम
झील किनारे गोद में सर रख सो जाना।४।
**
पीर हमें अब लगती सच में अपनी सी
फूल के  बदले  पथ में  काँटे  बो जाना।५।
**
बाद  तुम्हारे  तम  में  बैठे  अलसाये
कौन जलाये साँझ में दीपक रोजाना।६।
**
                            (५.१०.२०२०)

मौलिक-अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Views: 815

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 27, 2020 at 9:22am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार। 

Comment by TEJ VEER SINGH on October 27, 2020 at 8:46am

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी ।लाज़वाब गज़ल।

पीर हमें अब लगती सच में अपनी सी
फूल के  बदले  पथ में  काँटे  बो जाना।५।
**

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 24, 2020 at 9:49am

आ. भाई बसंत जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए आभार।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on October 23, 2020 at 5:15pm

आदरणीय लक्षण धामी जी सादर नमस्कार 
उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर.

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 20, 2020 at 1:07pm

आ. भाई रूपम जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व मनभावन प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 20, 2020 at 1:05pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 20, 2020 at 1:05pm

आ. भाई अमीरुद्ददीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 20, 2020 at 1:03pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

अंंतिम शेर को आपके परामर्शानुसार गजल से हटाना ही उचित होगा। सादर...

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 20, 2020 at 1:02pm

आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व सराहना के लिए आभार ।

अंंतिम शेर को आपके परामर्शानुसार गजल से हटाना ही उचित होगा। सादर...

Comment by सालिक गणवीर on October 15, 2020 at 9:52am

आदरणीय लक्षण धामी जी
सादर अभिवादन
उम्दा ग़ज़ल के लिए ढेरों बधाइयाँ स्वीकार करें. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
4 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन।बहुत सुंदर समसामयिक गजल हुई है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

   ग़ज़ल2122  2122  212 कितने काँटे कितने कंकर हो गयेहर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये रास्तों  पर …See More
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोधमानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध…See More
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service