For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

2212 - 1212 -  2212 - 12 

.

मुश्किल सहीह ये फिर भी है महबूब ज़िन्दगी

रब  का हसीन  तुहफ़ा  है क्या  ख़ूब ज़िन्दगी

.
आजिज़  हैं  ज़िन्दगी  से जो वो भी  मुरीद हैं
तालिब  सभी  हैं  इसके  है  मतलूब ज़िन्दगी

.

हर  लम्हा  शादमाँ  है  तेरे  दम  से  दिल मेरा
जब  से  हुई  है  तुझसे  ये   मन्सूब   ज़िन्दगी

.

जिसने  नज़र  उठा  के  भी  देखा  नहीं  मुझे 
उस  पर  हुई   है   देखिए   मरग़ूब   ज़िन्दगी

.

लोगों के दिल में जा बसो कर जाओ काम वो
सदियाँ  पढें  तुम्हारी   ही  मक्'तूब   ज़िन्दगी

.

ग़ालिब न  हो सको  न हो इतना  मगर  सुनो
हो   जाए   न  तुम्हारी   ये   मग़्लूब  ज़िन्दगी

.

अब   ज़िन्दगी   उजाड़    है   तेरे   बग़ैर   यूँ
जैसे    बग़ैर   जान   सी   मस्लूब    ज़िन्दगी

.

या  रब  तू  ले उठा  मुझे  या  कर दे सुर्ख़-रू
कब  से  उठाए  फिरता  हूँ  मायूब  ज़िन्दगी

.

इस ज़िन्दगी में कुछ भी दिलआवेज़ अब नहीं
बस  मैं  हूँ  और  मेरी  पुर-आशोब   ज़िन्दगी

.

बस आगे इसके अब न कुछ भी मुझसे पूछिये
शर्मिंदा  हूँ  मैं  ख़ुद  भी  है  महजूब ज़िन्दगी

.

कब जानता है वक़्त का कोई मिज़ाज 'अमीर'
हो  जाए  पार  कब  या  जाए   डूब  ज़िन्दगी

"मौलिक व अप्रकाशित"

---------------------------------------------------------

कठिन शब्दार्थ : महबूब - प्यारी, प्यारा, Beloved आजिज़ - तंग, परेशान 

मुरीद - आज्ञाकारी, आस्थावान, आकांक्षी, अभिलाषी, निष्ठावान 

तालिब - चाहनेवालेे, इच्छुक मतलूब - अभीष्ट, जिसकी चाहत हो

शादमाँ - ख़ुश, प्रसन्न मन्सूब - engage with, किसी के नाम समर्पित हो जाना 

मरग़ूब - जिसकी तरफ़ रुचि हो, फेवरिट, Desirable मक्'तूब - लिखित, लेख

ग़ालिब - predominate, प्रबल, विजेता, मग़्लूब - हताश, निर्बल, दबाया हुआ

मस्लूब - नष्ट-भ्रष्ट, वंचित, सूली पर चढ़ी सुर्ख़-रू - कामयाब, अविचलित, शांत, स्थिर 

मायूब - निकृष्ट, दूषित, ऐब से भरी, क़ाबिल-ए-शर्म दिलआवेज़ - मनभावन, ख़ुशी देने वाली 

पुर-आशोब - Mischievous, अशांत, उतार चढ़ाव भरी, घबराहट भरी, Tumultuous 

महजूब - लज्जित, शर्मिंदगी भरी, full of the shame. 

Views: 493

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 6, 2020 at 7:34pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से मशकूर हूँ। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 6, 2020 at 6:56pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई । 

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on October 6, 2020 at 1:49pm

आदरणीय सुशील सरना साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई के लिये तहे-दिल से मशकूर हूँ जनाब। सादर।

Comment by Sushil Sarna on October 6, 2020 at 12:28pm
आदरणीय अमीरुद्दीन जी, आदाब, खूबसूरत अहसास की खूबसूरत गजल, ,,दिल से मुबारक कबूल फरमाएं सर

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
1 hour ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात ही को भूल गया "
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"इस सुझाव को विशेष रूप से रूहानी नज़रिये से भी देखेंहुस्न मुझ पर सवार होने सेशेष सारी कमी को भूल…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आ. भाई दयाराम जी, अभिवादन व आभार।"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"हार्दिक आभार आदरणीय "
yesterday
Richa Yadav replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय दयाराम जी नमस्कार  बहुत शुक्रिया आपका  सादर "
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service