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यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैं...(ग़ज़ल मधु पासी 'महक')

बह्रे-रमल मुसद्दस सालिम

2122 / 2122 / 2122

यूँ ख़यालों में सनम आने लगे हैं

दिल को मेरे अब वो महकाने लगे हैं [1]

देखते हैं मेरी जानिब इस तरह से

राज़-ए-दिल जैसे वो बतलाने लगे हैं [2]

इश्क़ से अंजान हैं जो लोग अब तक

है मुहब्बत क्या ये समझाने लगे हैं [3]

वो सियासत-दाँ वतन जिनको था सौंपा

देश की मीरास बिकवाने लगे हैं [4]

वो रहा करते हैं आँखों में कुछ ऐसे

जागते में ख़्वाब दिखलाने लगे हैं [5]

हो रहे हैं कू-ब-कू उनके ही चर्चे

इसलिए वो ख़ुद पे इतराने लगे हैं [6]

ढूँढ लाओ फिर बहारों को 'महक' तुम

बाग़-ए-दिल के फूल मुरझाने लगे हैं [7]

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

––––––––––––––––––––––

कठिन शब्दों के अर्थ:

1. मीरास = पैतृक सम्पत्ति, धरोहर

2. कू-ब-कू = गली गली

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Comment by Madhu Passi 'महक' on August 31, 2020 at 10:31am

आदरणीय आशीष यादव जी सादर नमस्कार! आपकी हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by आशीष यादव on August 26, 2020 at 1:33am

बहुत अच्छी गजल बनी है। अच्छा लगा पढ़कर। बधाई स्वीकार कीजिए।

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 19, 2020 at 7:19pm

आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी नमस्कार! आपकी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on August 19, 2020 at 5:24pm

जैसा कि आदरणीय समर जी ने कहा...प्रयास वाकई में अच्छा आदरणीया..शुभकामनाएं

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 18, 2020 at 6:08pm

आदरणीय समर कबीर जी आदाब! आपकी हौसला अफ़ज़ाई के लिए तह-ए-दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ। 

 

Comment by Samar kabeer on August 18, 2020 at 4:02pm

मुहतरमा 'महक' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 17, 2020 at 9:27pm

आदरणीय सुरेंद्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' सादर नमस्कार! ग़ज़ल तक आने के लिए और हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत बहुत शुक्रिया। 

Comment by नाथ सोनांचली on August 17, 2020 at 5:37pm

आद0 madhu passi 'महक' जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल खिह आपने। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 17, 2020 at 10:18am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार! आपकी तह-ए-दिल से शुक्रगुज़ार हूँ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 17, 2020 at 10:00am

आ. मधु जी, सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

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