For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सिर्फ़ सन्नाटा है ता-हद्द-ए-नज़र अब मेरी(१०२ )

( 2122 1122 1122 22 /112 )

सिर्फ़ सन्नाटा है ता-हद्द-ए-नज़र अब मेरी

ख़्वाब की दुनिया गई यार बिखर अब मेरी

झूठ निकला मेरा दावा कि तेरे बिन न रहूँ

हिज्र के साथ है क्या ख़ूब गुज़र अब मेरी

नाख़ुदा है ही नहीं जब तो मुझे क्या मालूम

मौज ले जाएगी कब नाव किधर अब मेरी

कैसा माज़ी था मुहब्बत ही मुहब्बत से भरा

देखने की नहीं हिम्मत है उधर अब मेरी

फ़र्क सेहत पे न कुछ उसके है पड़ने वाला

जाती है जाये भले जान अगर अब मेरी

ज़िंदगी भर तो ग़मों से ही पड़ा पाला ख़ुदा

चन्द ख़ुशियाँ तो हों क़िस्मत में मगर अब मेरी

किस तरह ज़ीस्त की ये रेल चलेगी या रब

जब है पटरी से गई रेल उतर अब मेरी

कितने सालों से पराई हैं ख़ुशी की सुबहें

क्या ख़ुदा होगी कोई एक सहर अब मेरी

कर 'तुरंत' एक इशारा-ए-करम आज मुझे

या ख़ुदा झोलियाँ उम्मीद से भर अब मेरी

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 511

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 25, 2020 at 4:53pm

आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' साहेब ,आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार एवं नमन | 

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on May 25, 2020 at 3:20pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' साहिब, इस बेहतरीन ग़ज़ल पर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल करें।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 21, 2020 at 2:57pm

भाई  TEJ VEER SINGH जी ,  आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार | 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 21, 2020 at 2:56pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी , आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार | 

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 21, 2020 at 2:56pm

आदरणीय Samar kabeer साहेब ,आदाब , आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए दिल से आभार | 

Comment by Samar kabeer on May 21, 2020 at 2:26pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 21, 2020 at 8:46am

आ. भाई गिरधारी सिंह जी, सादर अभिवादन ।अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on May 20, 2020 at 3:35pm

भाई TEJ VEER SINGH जी , आपकी हौसला आफ़जाई के लिए दिल से शुक्रिया | 

Comment by TEJ VEER SINGH on May 20, 2020 at 11:53am

हार्दिक बधाई आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी जी। बेहतरीन गज़ल।

कितने सालों से पराई हैं ख़ुशी की सुबहें

क्या ख़ुदा होगी कोई एक सहर अब मेरी

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
Friday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service