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221   2121   1221   212

आँखों में बेबसी है दिलों में उबाल है.
कैसा फरेबी वक्त है चलना मुहाल है.

जो हर घड़ी करीब हैं उनका नहीं ख़्याल,
जो बस ख़्याल में है उसी का ख़्याल है.

रहता हूं जब उदास किसी बात के बिना,
तब खुद से पूछना है जो वो क्या सवाल है

.

पहुँचें हैं जिस मकाम पर उससे गिला हो क्या,
बस रास्तों की याद का दिल में मलाल है.

कुछ लोग बदहवास हैं सोने के भाव से,
कुछ लोग मुतमईन हैं रोटी है दाल है.

ग़म आपके न होने का शायद नहीं है अब,
मुश्किल में अपने फर्ज की अब देखभाल है.

'अहसास' इस जहान में बाकी नहीं है कुछ,
जो सबका हाल है वही मेरा भी हाल है.

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by मनोज अहसास on April 23, 2020 at 10:41pm

आदरणीय लक्ष्मण जी

हार्दिक आभार

सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 20, 2020 at 3:54pm

आ. भाई मनोज जी, अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई ।

Comment by मनोज अहसास on April 19, 2020 at 11:04am

बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सिंह जी सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on April 19, 2020 at 10:05am

हार्दिक बधाई आदरणीय मनोज अहसास जी। बेहतरीन गज़ल।

पहुँचें हैं जिस मकाम पर उससे गिला हो क्या,
बस रास्तों की याद का दिल में मलाल है.

Comment by मनोज अहसास on April 18, 2020 at 10:52pm

आदरणीय अरुण जी एवं salik जी

हार्दिक आभार

सादर

Comment by सालिक गणवीर on April 17, 2020 at 11:45am
कुछ लोग मुतमईन है रोटी है दाल है.. वाह. बहुत उम्दा
Comment by ARUNESH KUMAR 'Arun' on April 17, 2020 at 6:34am

बहुत खूब

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