For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बाँधा जो साँसों ने साँसों से धागा

बाँधा जो साँसों ने साँसों से धागा

आँसू में, कुछ मुस्कानों में

मिलन की वेला के सुख में मिश्रित

बिछोह की घड़ी की व्यथा अपार

डरते-मुस्कुराते चेहरे पर पाईं हमने

ढुलक आई थीं बूँदें जो भीगी पलकों से

मिला था उनमें प्राणों को प्रीति का दान

ऐसे में हृदय ने सुनी हृदय की मधुर धड़कन

मधुमय मूक स्वर उस अद्वितीय आलिंगन में

आच्छादित हुए ऐसे में ज्यों भीगे गालों पर गाल

मुझको लगा उस पावन पल वह आँसू नहीं थे

झर-झर आए अम्बर से थे वह स्वर सम्मोहन के

हँस दिए पल भर में गीले नयन तेरे, गीले नयन मेरे

एक ही लड़ी में मिलन-बिछोह की अनोखी घड़ी में

खिले थे अन्तर में मानो अप्रतिम रक्तिम गुलाब अनेक

ज्यों स्नेह में जुड़ी साँसो से साँसे, आँचल थामे तुम शरमाई 

कहो, एक संग चले आए कैसे सचमुच सारे के सारे मौसम

आए मधुमास-गीत बने ... वसन्त, वर्षा और शरद का शीत

न, न, अल्भय स्वप्न नहीं .. है ज़रूर यह तुम्हारी प्रीति की रीत

मिलन की मधुरिमा में मुखरित बिछोह की वेला

आए हैं मौसम तो आएगा हमारे जीवन में पतझड़ भी

बोलो, सदा आश्वासन बनी रहोगी न ओ’ प्राण-प्रिय

मेरी कवितायों की प्रतिमे

मेरे उलझे-उलझे सपनों की हलकी रेखा-छाया

तोड़ तो न दोगी बाँधा जो साँसों ने साँसों से धागा ?

                          -------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

Views: 140

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on March 18, 2020 at 4:13pm

आपका हार्दिक आभार, प्रिय मित्र लक्ष्मण जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 17, 2020 at 6:08pm

आ. भाई विजय निकोर जी, सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है हार्दिक बधाई ।

Comment by vijay nikore on March 17, 2020 at 2:52pm

आपका हार्दिक आभार, प्रिय मित्र श्याम जी

Comment by vijay nikore on March 17, 2020 at 2:52pm

आपका हार्दिक आभार, प्रिय भाई समर कबीर जी

Comment by Shyam Narain Verma on March 17, 2020 at 1:04pm
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by Samar kabeer on March 17, 2020 at 7:08am

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब, बहुत अच्छी रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post चाँद को जब बदसूरत करने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति और स्नेह के लिए आभार । आपने उचित बदलाव सुझाए हैं । हार्दिक…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post ढूँढा सिर्फ निवाला उसने - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व उत्तसाहवर्धन के लिए आभार।"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जी, ठीक है अब ।"
8 hours ago
Krish mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"बहुत बहुत शुक्रिया आ. अमीरुद्दीन सर आपकी हौसलाफजाई के लिये। सादर"
8 hours ago
Krish mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"आ. समर सर देखें क्या प्रयास सफल हुआ बेहतरी का.. धूप की छांव में लेटा हुआ गीला सा चाँद खूबसूरत सी…"
8 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जनाब मिश्रा जी आदाब, तरही मिसरे पर अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। मतला ख़ास पसंद…"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जनाब 'Krish Mishra' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल…"
9 hours ago
Krish mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जी शुक्रिया, मेहरबानी ज़र्रानवाज़ी के लिए आ. रचना जी। सादर"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जनाब दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
9 hours ago
Krish mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"शुक्रिया आ. धामी सर जी।"
9 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"जनाब लक्ष्मण भाई दलीलें तो बहुत हैं : ''हमने बाज़ार में ज़ख्मों की नुमाइश नहीं…"
9 hours ago
Krish mishra replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-127
"बिल्कुल होगी जैसे सर्दियों की धूप आजकल छाँव जैसी ही है। सादर"
9 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service