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थोड़ा आगे आने दो ,
मौक़ा उनको पाने दो ।


देखो, भटके फिरते हैं ,
उनको भी समझाने दो ।


कब तक सहना पाबंदी ,
दौर नया दिखलाने दो ।


सबको राहत मिल जाये ,
मौसम ऐसा आने दो ।


फिक्र करो मत दुनिया की ,
छोड़ो यारो जाने दो ।

.
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by Mohammed Arif on March 9, 2017 at 10:19am
बहुत-बहुत आभार आदरणीय विजय निकोरे जी ।
Comment by Mohammed Arif on March 9, 2017 at 10:17am
बहत-बहुत शुक्रिया आदरणीय बृजेश कुमार जी ।
Comment by Mohammed Arif on March 9, 2017 at 10:16am
बहुत-बहुत आभार आदरणीय गिरिराज भंडारी ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 9, 2017 at 9:23am

आदरणीय  आरिफ भाई , बहुत अच्छी गज़ल कही है आपने , छोटी बहर में अच्छे शेर निकाले हैं । मुबारकबाद कुबूल कीजिये ।

Comment by Mohammed Arif on March 9, 2017 at 9:02am
आदरणीय सत्य नारायण जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया ।
Comment by Satyanarayan Singh on March 8, 2017 at 11:12pm

शानदार ग़ज़ल कही है आपने आदरणीय सादर बधाई 

Comment by vijay nikore on March 8, 2017 at 11:07pm

बहुत ही खूबसूरत गज़ल । हार्दिक बधाई, आदरणीय आरिफ़ जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 8, 2017 at 10:14pm
खूबसूरत सरस ग़ज़ल..हार्दिक बधाई आदरणीय
Comment by Mohammed Arif on March 8, 2017 at 9:50pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय महेन्द्र कुमार जी । लेखन सार्थक हुआ ।
Comment by Mahendra Kumar on March 8, 2017 at 9:17pm
बहुत ख़ूब आदरणीय मोहम्मद आरिफ़ जी। इस उम्दा ग़ज़ल पर ढेर सारी मुबारक़बाद क़ुबूल फरमाएँ। सादर।

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