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मोहतरम जनाब योगराज प्रभाकर साहिब की फ़रमाइश पर कही गई तरही ग़ज़ल नम्बर-2

मफ़ाईलुन मफ़ाईलुन फ़ऊलुन

यहाँ हर सू जिहालत है? नहीं तो
पढ़े लिक्खों की क़ीमत है? नहीं तो

सुख़न पर कोई पाबन्दी नहीं अब
ज़बाँ खोलूँ, इजाज़त है? नहीं तो

भरे दरबार में सच बोलना है
तिरे दिल में ये हिम्मत है? नहीं तो

बदल सकता नहीं फ़रमान तेरा
ये क्या क़ुरआँ की आयत है? नहीं तो

अदक़ अल्फ़ाज़ रख देना ग़ज़ल में
इसी का नाम जिद्दत है? नहीं तो

नहीं दौलत ये मिहनत से कमाई
तो क्या माल-ए-ग़नीमत है? नहीं तो

बुलाया है जिन्हें दावत प उन में
शऊर-ए-आदमीयत है? नहीं तो

मुझे छोड़ो,किसी के वास्ते भी
तुम्हारे दिल में इज़्ज़त है? नहीं तो

बना सकती है जन्नत जो वतन को
यही क्या वो हुकूमत है? नहीं तो

ग़ज़ल यूँ पेश करना भाग जाना
ये ओबीओ की ख़िदमत है?नहीं तो

"समर" पेशा तेरा तक़रीर करना
तुझे शौक़-ए-शहादत है? नहीं तो

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

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Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on May 7, 2017 at 3:24pm
आदरणीय समर कबीR जी,उम्दा,उम्दा ,उम्दा....सादर नमन लेखनी को!
Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 7, 2017 at 10:15am

वाह वाह अति सुंदर 

भरे दरबार में सच बोलना है
तिरे दिल में ये हिम्मत है? नहीं तो

Comment by Neeraj Neer on May 6, 2017 at 10:46pm

वाह क्या खूब ग़ज़ल हुई है .... 

Comment by नाथ सोनांचली on May 6, 2017 at 8:12pm
आद0 समर कबीर साहब सादर प्रणाम। एक एक अशआर में आपने बेहद संजीदगी से विभिन्न विषयों को उठाया है जिसे पढ़कर मन बार बार पढ़ने को करता है, । आपकी तरही गजल बेहद उम्दा है, शब्द नही मिल रहे तारीफ के । मेरी बधाई स्वीकार करें। सादर
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:47pm
जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज'साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:46pm
जनाब गिरिराज भंडारी जी आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:44pm
जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,सुख़न नवाज़ी के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया ।
'अदक़'शब्द हो या 'अदक़्क़'दोनों ही सूरतों में मिसरा बह्र में है, और तक़ाबुल-ए-रदीफ़ के बारे में आपने देखा होगा कि मैं आज कल अपनी ग़ज़ल पर नोट लगा देता हूँ,इस बार भूल गया ।
'अदक़'और 'अदक़्क़'के बारे में आप कहेंगे तो विस्तार से बता दूँगा ।
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:37pm
जनाब गुरप्रीत सिंह जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:33pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।
Comment by Samar kabeer on May 6, 2017 at 4:31pm
जनाब रवि शुक्ल जी आदाब,ग़ज़ल में शिर्कत और दाद-ओ-तहसीन के लिये आपका तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ ।

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