For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शादी की दावत -1 (कहानी )

शादी की दावत -1

स्टेशन से सीधे हम अजय भईया के घर पहुँचे |मड़वा में स्त्रियाँ उन्हें हल्दी-उबटन मल रही थीं |बड़े बाउजी यानि की मानबहादुर सिंह परजुनियों को काम समझाने में व्यस्त थे |बीच-बीच में वे द्वार पर आ रहे मेहमानों से मिलते उनकी कुशल-खैर पूछते और आगे बढ़ जाते |

“अरे सीधे ,स्टेशन से आ रहे हो क्या ?” हमारा समान देखकर शायद उन्हें अंदाज़ा हो गया था |

“जी,हमनें आपस में बात कर ली थी |गाड़ी आने के समय में भी ज़्यादा फ़र्क नहीं था इसलिए हम सब स्टेशन पर ही - -- “बारी-बारी से हमनें उनके चरण-स्पर्श किए और महेश ने ये कथन निवेदित किया |

“अच्छा किया| देखों,तुम्हारे भाई की शादी है और सम्भालने वाला मैं अकेला |कोई कमोबेशी हो तो बुरा ना मानना |”

अरे फूफाजी,काहे शर्मिंदा कर रहे हैं |क्या ये बात हम नहीं जानते हैं ?आप हमारी फ़िक्र छोड़ें और व्यवस्था सम्भालें |”हरीश बोला |

“अगर हमारे लायक कोई सेवा हो तो बताईये - - -“ सतीश बोल उठा |

“तुम लोग यात्रा करके आए हो |थक गए होगे |नहा-धोकर आराम कर लो |शाम को बारात भी तो करनी है |देखों,नाचने-गाने में कोई कमी-कसर नहीं रहनी चाहिए |”इसके बाद वो किसी और नातेदार की तरफ मुड़ गए |

“अब|” संतोष ने भौहे उचकाते हुए बाकि चारों से पूछा |

“ अब महेश भईइया के घर चलते हैं |”हरीश ने महेश की तरफ देखते हुए कहा |

“आगाज़ ये है तो अंजाम होगा - - -“ सतीश ने मसखरी करते हुए कहा |

अजय भईया महेश के पुश्तैनी सम्बन्धी थे |दोनों के परदादा सगे भाई थे |महेश के दादा ने कलकत्ता में नौकरी करी और गाँव और शहर में अलग घर बनाया |अजय अपने पिताजी के साथ बाग वाली खानदानी हवेली में रहता था जो रख-रखाव के आभाव में खंडर होने लगी थी | महेश का परिवार कलकत्ता बसा था और केवल विशेष मौको पर या जलवायु-परिवर्तन के लिए गाँव आता था |बाकी लोग भी इस कुनबे की रिश्तेदारियों से जुड़े थे तथा हमउम्र होने के कारण एक दुसरे से घुले-मिले थे |महेश के दादाजी  छह भाई थे और सबके मकान आस-पास बने थे इनमें से एक चाचा यही पर रहते थे बाकि लोग अलग-अलग शहरों में बसे थे |

घर में जहाँ-तहाँ अपना बैग पटक सभी लोग गर्द भरी चारपाई पर ही लोट गए और अपनी कमर सीधी करने लगे |

“ ठक-ठक-ठक “ सांकल बजने पर महेश ने दरवाज़ा खोला |

“नमस्ते भईया,अम्मा पानी-भेली भेजीं हैं और कहीं हैं कि आप लोग हाथ-मुँह धोकर घर आ जाएँ |वो चाय और नाश्ता तैयार कर रही हैं |”चुनमुनिया जो कि महेश के ताऊ-दादा की पोती थी ने आकर कहा |

“बहिनी चाची से कहना कि बस चाय भिजवा दें |खाने-वाने की परेशानी ना करें |शादी में आए हैं तो खाना-पीना भी वहीं करेंगे |”महेश ने चुनमुनिया के सिर पे हाथ फेरते हुए कहा |

“वाह रे बैल !चाय तो मिली नहीं वहाँ खाने की बात कह रहे हो -- - - लगता है आज उपवास ही करवाओगे “संतोष ने मुँह बनाते हुए कहा |

“उनसे जो बनेगा करेंगे |पर किसी की इज्जत उछालने से क्या मिलेगा ?”महेश ने बिगड़ते हुए कहा |

“तुम्हारे खानदान में ऐसे ही होता है |जब सपरता नहीं है तो काहे न्यौता भेजे ?”संतोष ने नाराज़ होकर कहा |

सबने बीच-बचाव कर बात को बिगड़ने से रोका |

“हमकों भूख लगा है |किसी पर कुछ खाने को है ?” संतोष बड़बड़ाया

हरीश ने अपने बैग से बिस्कुट का पैक्ट निकालकर उसकी तरफ उछाला और वो कूटूर-कूटूर करके बिस्कुट खाने लगा |

थोड़ी देर बाद चुनमुनिया चाय और पकौड़े रखकर चली गई |पांच मिनट में प्लेट और कप खाली हो गए |

“बस दू-दू पकौड़ा खाने को मिला,इससे तो भूख और जोरिया गई है - - - -किसी से पता करवाते कि खाने-पीने का क्या इंतजाम है उहाँ |”संतोष ने महेश की तरफ देखते हुए कहा |

“पहले नहा-धो लेते हैं |हो सकता है तब तक कोई खाने के लिए बुलाने आ जाए |” महेश ने सुझाव दिया |

एक बजे तक सब नहा-धोकर तैयार हो गए |

“अब !अभी तक तो कोई बुलाने नहीं आया ?” सतीश ने पूछा

“मेरे विचार में बिना बुलाए द्वार पर जाना सही नहीं रहेगा |”हरीश बोला |

इंतजार करते-करते दो बज गए |

“भाई लोगों आस-पास कोई बाज़ार है |वहीं चलते हैं |यहाँ तो भूख से प्राण निकल रहे हैं |”संतोष ने कहा |

“बाज़ार यहाँ से तीन किलोमीटर पर है और वहाँ जाने का कोई साधन यहाँ नहीं मिलेगा |पर गाँव में एक परचून की दुकान है वहाँ मैगी-नमकीन-बिस्कुट मिल सकता है |”महेश ने कहा

“नेकी और पूछ-पूछ |भाई जाकर कुछ लाते क्यों नहीं ?वैसे भी हम तो तुम्हारे पाहुन हैं |”हरीश बोला

“घर में ईन्धन नहीं है |जब तक मैं सामान लेकर आऊँ तुम लोग सामने की तल्लैया वाले बाग से कुछ लकड़ी बीन लाओ |” महेश ने कहा

“भाई ये गाड़ी बिना पेट्रोल के नहीं चलती |तुम लोग सामान लाओ| मैं घर अगोरूँगा |” पेट के बल लोटते हुए संतोष बोला |

लगभग आधे घंटे में सामान इकट्ठा हो जाता है |छत पर पड़ी ईटों को जमकर चूल्हा बनाते हैं और उस पर मैगी पकती है |साथी लोग बाग से बेर भी बीन लाए थे |कुल मिलाकर पेट भरने का प्रबंध हो जाता है |पेट भरकर हम वहीं बिस्तर पर चित्त हो गए |

शाम को गाँव में बजते बाजे और किवाड़ की कुण्डी खड़कने से हमारी नींद टूटती है |

मौलिक एवं अप्रकाशित

                                                                            क्रमशः

 

 

 

 

 

 

Views: 1074

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 3, 2015 at 10:27pm

अच्छी लगी यहाँ तक की कहानी आदरणीय सोमेश भाई जी. बधाई

Comment by somesh kumar on March 3, 2015 at 7:46pm

कहानी पढ़ने , पसंद करने और अपनी अमूल्य प्रतिक्रिया देने के लिए सभी मित्रों का आभार 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on March 3, 2015 at 6:33pm

प्रिय सोमेश

अगले अंक की प्रतीक्षा है I


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on March 3, 2015 at 5:45pm

आदरणीय सोमेश भाई , कहानी अच्छी चल रही है , उत्सुकता जगाने में कामयाब है ॥ आपको बधाइयाँ ॥

Comment by Hari Prakash Dubey on March 3, 2015 at 5:27pm

सोमेश भाई ,इस बार आपकी कहानी मजबूती से उभर रही है , भाग -२ का इंतज़ार रहेगा ,हार्दिक बधाई आपको ! सादर 

Comment by maharshi tripathi on March 3, 2015 at 4:58pm

इस  सुन्दर और रुचिपूर्ण कहानी पर आपको बधाई आ.सोमेश जी |

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on March 3, 2015 at 9:48am

आदरणीय सोमेश कुमारजीबहुत सुन्दर कहानी.......

शुरू से ही पाठक को बाँध लेती है और अंत तक रोचक बनी हुयी है ......अब आगे जो क्रमश से व्यवधान आ गया है  उसका इंतज़ार है.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

बृजेश कुमार 'ब्रज' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ जैसे मंच की ये स्थिति अत्यंत कष्टप्रद है। अपने स्वास्थ्य और पारिवारिक विवशताओं , व्यस्ततओं…"
7 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी नहीं.. चर्चा जारी रहे।  'अभी' अलविदा ना कहना.. "
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय सौरभ भाई, आप ने सभी बातें सविस्तार कही और अनेकों संशयों को समाप्त किया। इसके पश्चात और कुछ…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"यह डेटाबेस तक पहुंच का प्रश्न है। सामान्यतः पोर्टल सर्विसेज एजेंसी साइट ओनर को डेटाबेस तक पहुंच…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता ’अजेय’ जी, आपकी संलग्नता आश्वस्तिकारी है. आपका सोचना आपके पहलू से…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"इस सारी चर्चा के बीच मैं एक बात और कहना चाहता हूँ। जैसा कि हम सबने देख लिया कि सदस्य इस मंच के लिए…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जी आदरणीय "
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
Wednesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
Wednesday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
Wednesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service