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सेवानिवृत्ति (लघुकथा)/ रवि प्रभाकर

‘अरे बहू ! चाय नहीं लाई अभी तक, और अखबार कहाँ है, मेरा शेव का सामान भी नज़र नहीं आ रहा।

‘बाबू जी, पहले बच्चों को तैयार करके स्कूल भेज दूँ फिर आपके लिए चाय बनाती हूँ। अखबार तो अभी मुन्नी के पापा पढ़ रहें है आप बाद में आराम से पढ़ लेना। और अब आपको हर रोज़ दाढ़ी बनाने की क्या ज़रूरत ही ? आपको अब कौन सा दफ्तर जाना है।’

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(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by शिज्जु "शकूर" on October 5, 2016 at 6:05pm

आदरणीय रवि सर आपकी रचना सच्चाई बयाँ कर रही है हालाँकि मेरे रिटायर होने में समय है:-) लेकिन तकलीफ तो समझ में आती है, बहुत बहुत बधाई आपको 

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on October 5, 2016 at 5:56pm

बढ़िया कथा | हार्दिक बधाई आदरणीय |

Comment by kanta roy on July 13, 2015 at 10:03pm
सेवा निवृत्ती और अकारथ जीवन जीने का एहसास । कहते है कि जब तक काम करते रहते है जिंदगी से भरपूर रहते है । तमाम उम्र नौकरीपेशा लोग सपना देखते है इस आराम की जिंदगी का लेकिन अक्सर ये मृगतृष्णा ही साबित होती है । सच तो है कि रिटायरमेंट के बाद अचानक ही घर का प्रथम व्यक्ति दोयम या .... श्रेणी में आ जाया करता है । इसलिए जब तक जीवन स्वंय ना रिटायर कर दे हमें रिटायरमेंट का ख्वाब नहीं देखना चाहिए । बेहद गहरे भाव है इन चंद पंक्तियों में ..... बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय रवि जी इस सार्थक लघुकथा के लिए ।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 13, 2015 at 6:25pm

प्रिय अनुज रवि , क्या बात है ! सेवानिवृति के बाद की अपनी अलग प्रकार की तकलीफें होतीं है , आपने सच बात कही है । मै भी सेवानिवृत हूँ , अच्छे से समझ सक रहा हूँ । कथा के लिये हार्दिक बधाइयाँ ।

Comment by VIRENDER VEER MEHTA on July 12, 2015 at 10:00pm
आदरणीय रवि प्रभाकर जी शीर्षक सेवानिवृति को सार्थक करती और उसके प्रभाव को साक्षात दिखाती सुन्दर कथा। सादर बधाई स्वीकार करे।
Comment by विनय कुमार on July 12, 2015 at 9:54pm

बहुत बढ़िया लघुकथा , एकदम सधे शब्दों में एक सेवानिवृत्त व्यक्ति की स्थिति बतादी आपने । लेकिन इसका शीर्षक कुछ और रखना था क्योंकि शीर्षक पढ़ने के बाद पहली ही पंक्ति में कथा समझ में आ गयी थी । बधाई आदरणीय इस लघुकथा के लिए..

Comment by Omprakash Kshatriya on July 12, 2015 at 6:21pm
आदरणीय Ravi Prabhakar जी
सेवा निवर्ीत व्यक्ति की दशा को व्यक्त करती लघुकथा । बधाई आप को ।
Comment by MAHIMA SHREE on July 12, 2015 at 5:52pm

बहुत सही चित्रांकन ...बधाई स्वीकार करें..

Comment by savitamishra on July 12, 2015 at 5:44pm

तीनों चीजे एक साथ चाहिए ..बढ़िया कथा ..सादर नमस्ते


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on July 12, 2015 at 1:48pm

आदरणीय रवि जी सेवानिवृत्त की स्थिति को रेखांकित करने में सफल रचना की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई 

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