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मौत से कह दो न रोके -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)

२१२२/२१२२/२१२२/२१२

लेके आया फिर से बचपन शायरी का सिलसिला
मौत से कह दो  न  रोके  जिन्दगी का सिलसिला।१।
**
रोक  तेजाबों  घुएँ  की  गन्दगी  का सिलसिला
इन हवाओं में भरो कुछ ताजगी का सिलसिला।२।
**
कोशिशें दस्तक  जो  देंगी  शब्द तोड़ेगे कभी
मौन की गहरी हुई इस तीरगी का सिलसिला।३।
**
हैं बहुत  कानून  अपनी  पोथियों  में  यूँ मगर
रुक न पाया भ्रष्ट होते आदमी का सिलसिला।४।
**
एक जुगनू ने कहा  ये  भर तमस के काल में
डर न तम से मैं रखूँगा रौशनी का सिलसिला।५।

मौलिक / अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 7, 2020 at 8:52pm

आ. भाई रामबली जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन््वादद।

Comment by रामबली गुप्ता on July 7, 2020 at 6:31pm

बढियाँ ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारें भाई लक्ष्मण धामी जी

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 7, 2020 at 9:18am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए आभार ।

Comment by TEJ VEER SINGH on July 7, 2020 at 8:40am

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी। बेहतरीन गज़ल।

हैं बहुत  कानून  अपनी  पोथियों  में  यूँ मगर
रुक न पाया भ्रष्ट होते आदमी का सिलसिला।४।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 7, 2020 at 2:21am

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, सराहना व मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 7, 2020 at 2:19am

आ. भाई अमीरूद्दीन जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति , सराहना व सलाह के लिए आभार । 

Comment by Samar kabeer on July 4, 2020 at 3:10pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, बधाई स्वीकार करें ।

'रोक  तेजाबों  घुएँ  की  गन्दगी  का सिलसिला'

इस मिसरे में 'तेजाबों' शब्द को 

इस तरह लिखें "तेज़ाब-ओ-'

बाक़ी जनाब अमीर जी की बातों का संज्ञान लें ।

पारिवारिक कारणों से कुछ समय ओवीओ पर हाज़िर नहीं हो सकूँगा,सिर्फ़ तरही मुशाइर: में शिर्कत हो सकेगी,आपको कहीं मेरी ज़रूरत महसूस हो तो फ़ोन पर सम्पर्क कर सकते हैं ।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on July 3, 2020 at 5:17pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, ख़ूबसूरत ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें।

चन्द टंकण त्रुटियां रह गयी हैं :  'रोक  तेजाबों  घुएँ की गन्दगी का सिलसिला'  "तेजाबों  घुएँ"  = तेज़ाब ओ धुएँ

'लेके आया फिर से बचपन शायरी का सिलसिला'       शायरी का सिलसिला.   "शायरी".        = शाइरी 

'मौत से कह दो न रोके जिन्दगी का सिलसिला          जिन्दगी का सिलसिला  "जिन्दगी"        = ज़िन्दगी 

'इन हवाओं में भरो कुछ ताजगी का सिलसिला            ताजगी का सिलसिला'   "ताजगी".      = ताज़गी

'कोशिशें दस्तक जो देंगी शब्द तोड़ेगे कभी'.                       शब्द तोड़ेगे कभी'   "तोड़ेगे"         =  तोड़ेेंगे

'हैं बहुत कानून अपनी पोथियों में यूँ मगर'.                             हैं बहुत कानून'   "कानून".       = क़ानून

अब कुछ तकनीक पर बात करते हैं : 

//लेके आया फिर से बचपन शायरी का सिलसिला

मौत से कह दो न रोके जिन्दगी का सिलसिला।१।// इस शैर के मिसरों में रब्त की कमी है: जो बात आप सानी में  कह रहे हैं, वो (मौत का) अहसास बुढ़ापे में होना फ़ितरी है लेकिन ऊला में आप बचपन पर फोकस्ड हैं। *लेके आया फिर बुढ़ापा शाइरी का सिलसिला * कह के देखें। 

//इन हवाओं में भरो कुछ ताजगी का सिलसिला।२।// हवाओं में ताज़गी कुदरती होती हम सिर्फ उस ताज़गी को बरक़रार रखने व गंदगी को रोकने का प्रयास कर सकते हैं। *इन हवाओं में रहे बस ताज़गी का सिलसिला* कह के देखें। सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 3, 2020 at 1:00pm

आ. भाई रवि भसीन जी, सादर अभिवादन ।गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सराहना के लिए हार्दिक आभार ।

Comment by रवि भसीन 'शाहिद' on July 3, 2020 at 12:42pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' भाई, इस लाजवाब ग़ज़ल पर आपको दाद और मुबारकबाद पेश करता हूँ!

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