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ठूंठ - लघुकथा -

राम दयाल अपनी घर वाली की जिद के आगे झुक गया। हालांकि उसकी दलील इतनी मजबूत तो नहीं थी लेकिन वह घर में किसी प्रकार की क्लेश नहीं चाहता था। उसकी घर वाली का मानना था कि उसके सासु और ससुर की वजह से उसके बेटे की शिक्षा पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था।

अतः वह चाहती थी कि सासु ससुर जी को वृद्धाश्रम भेज दो।

आज मजबूरन राम दयाल उन दोनों को वृद्धाश्रम छोड़ कर घर वापस जा रहा था।लेकिन उसका मन इस कृत्य के लिये उसे धिक्कार रहा था।

वृद्धाश्रम से बाहर जैसे ही वह मुख्य सड़क पर मुड़ा, उसकी नज़र सड़क किनारे कुछ कटे हुए वृक्षों के ठूंठों पर पड़ी।

उन ठूंठों की बगल में उन पेड़ों के ऊपरी अवशेष पड़े हुए थे। जो कि सूख चुके थे।क्योंकि उन्हें उनकी जड़ों से जुदा कर दिया गया था।

थोड़ा आगे निकलते ही राम दयाल को अपने माँ बाप उन कटे हुए पेड़ों की मानिंद नज़र आये।राम दयाल का हृदय चीत्कार कर उठा।

उसकी गाड़ी के ब्रेक अपने आप लग गये। कुछ पल वह ऊहापोह की स्थिति में उलझा रहा।लेकिन उस स्थिति से उबरने मेंउसे कुछ क्षण लगे।

अब उसकी गाड़ी पुनः वृद्धाश्रम जा रही थी।

मौलिक, अप्रकाशित एवम अप्रसारित

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Comment by TEJ VEER SINGH on January 4, 2020 at 11:15am

हार्दिक आभार आदरणीय   लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on January 4, 2020 at 11:14am

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 4, 2020 at 6:42am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा हुई है हार्दिक बधाई स्वीकारें ।

Comment by Samar kabeer on January 3, 2020 at 3:36pm

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 31, 2019 at 8:08pm

हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी जी।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 31, 2019 at 2:05pm

आदाब। बेहतरीन भावपूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई जनाब तेजवीर सिंह साहिब।

Comment by TEJ VEER SINGH on December 29, 2019 at 7:45pm

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव  जी।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 29, 2019 at 6:26pm

सुन्दर i आत्मग्लानि से उभरता आत्मबोध i 

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