For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-कुछ बन्द गीत के हैं कुछ शे'र हैं ग़ज़ल के-बृजेश कुमार 'ब्रज'

बहरे मज़ारिअ मुसम्मन मक्फ़ूफ़ मक्फ़ूफ़ मुख़न्नक मक़्सूर
मफ़ऊलु फ़ाइलातुन मफ़ऊलु फ़ाइलातुन

ये वक़्त के फ़साने सब पैतरे हैं छल के
तुम भी बिखर न जाना यूँ मेरे साथ चल के

उस डायरी में तुमको कुछ भी नहीं मिलेगा
कुछ बन्द गीत के हैं कुछ शे'र हैं ग़ज़ल के

ये याद भी नही है शोला थ याकि शबनम
हालाँकि उस बला ने देखा तो था मचल के

अब क्या तुम्हें बताएं किस बात का गुमां है
कल रात चाँद मेरी छत पे गया टहल के

किस बात से खफा है मग़रूर ये अँधेरा
कितना करूँ मैं रौशन यूँ रात रात जल के

आसान भी नहीं है इनसे निजात पाना
हैं मुद्दतों के गम 'ब्रज' झगड़े नहीं ये कल के

(मौलिक एवं अप्रकाशित) 
बृजेश कुमार 'ब्रज'

Views: 686

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 14, 2019 at 8:46pm

हार्दिक आभार आदरणीय विजय जी...

Comment by vijay nikore on October 8, 2019 at 1:43pm

गज़ल अच्छी लगी। हार्दिक बधाई मित्र बृजेश जी।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2019 at 9:21pm

सलाह और इस्लाह के लिए शुक्रिया आदरणीय समर जी..कुछ सुधार की कोशिश करता हूँ..

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2019 at 9:20pm

रचना पटल पे आपका स्वागत है आदरणीय श्याम नारायण जी...

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 4, 2019 at 9:19pm

स्वागत संग आभार आदरणीय बासुदेव जी...

Comment by Samar kabeer on October 4, 2019 at 11:38am

जनाब बृजेश कुमार 'ब्रज' जी आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।


'हैं मुद्दतों के गम 'ब्रज' मसले नहीं ये कल के'

इस मिसरे में 'मसले' शब्द ग़लत है,सहीह शब्द है "मसअले",देखियेगा ।

Comment by Shyam Narain Verma on October 2, 2019 at 6:35pm
आदरणीय बृजेश कुमार जी, प्रणाम, बहुत ही सुंदर ग़ज़ल, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by बासुदेव अग्रवाल 'नमन' on October 1, 2019 at 4:44pm

आ0 बृजेश कुमार जी बहुत सुंदर ग़ज़ल हुई है। बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
8 minutes ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
3 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
3 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
6 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
19 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
19 hours ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday
Admin replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"साथियों, आप सभी के बहुमूल्य विचारों का स्वागत है, इस बार के लिए निर्णय लिया गया है कि सभी आयोजन एक…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service