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Dr.Ajay Khare's Blog (38)

जीने की बात करता हूँ

जीने की बात करता हूँ

मै हर इंसान से जीने की बात करता हूँ

औरों के गम पीने की बात करता हूँ

चिंदी ,चिंदी हुई है, जो जीवन की किताब

हर चिंदी को सीने की बात करता हूँ

बचा जो डूबने से, उसे खुदाहाफिज

डूबे भंवर मै, सफीने की बात करता हूँ

दौलत की चमक से मचल रही दुनिया

मै बिन तराशे नगीने की बात करता हूँ

हुए शहीदे-बतन जो मिटाकर अपनी हस्ती

मै उनके खून पसीने की बात करता हूँ

जिन्दगी अपनी कटी बे हिसाब बे तरतीव

औरों से मै करीने…

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Added by Dr.Ajay Khare on April 29, 2013 at 12:53pm — 9 Comments

नारी उत्थान

नारी उत्थान 

महिलाओं की स्थिति में निरंतर सुधार

ऐसा कहते टीबी टीवी, अखबार

ऐसी ख़बरों का संकलन

कथनी करनी का आकलन 

"महिला आरझन आरक्षण बिल की बात संसद मै उठाई "

"महिला की सरेआम पिटाई 

नारी देवीतुल्य जननी

दहेज़ के…
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Added by Dr.Ajay Khare on April 18, 2013 at 4:30pm — 9 Comments

ये तो होना ही था

जिन्दगी में ये सब होना ही था

हर ख़ुशी की चाह मे रोना ही था

रिश्ते नाते प्यार वादों का महल

टुटा खंडहर एक दिन होना ही था

दूसरों के बोझ ढोते रह गए

अपने गम का बोझ भी ढोना ही था…

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Added by Dr.Ajay Khare on April 3, 2013 at 12:00pm — 3 Comments

हो गई होली

                     हो गई होली

   जलाई चन्द लकड़ियाँ, तो हो गई होली

 खाई गुजिया पपड़ियाँ, तो हो गई होली

 हुए हुड्दंगों मै शुमार, तो हो गई होली

 निकाले  दिल के गुबार, तो हो गई होली

 पी दो घूँट शुरा, तो हो गई होली

 निकाले  चाकू छुरा, तो हो गई होली

 छानी ठंडाई भांग, तो हो गई होली

खींची अपनों की टांग, तो हो गई होली

छेड़ी वेसुरी तान ,तो हो गई होली

किया नाली मै स्नान, तो हो गई होली

 देखे रंगीन माल, तो हो गई…

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Added by Dr.Ajay Khare on March 18, 2013 at 10:46am — 2 Comments

नापाक, पाक

नापाक, पाक

हे निर्लज्ज निकर्ष्ठ पडोसी

तुझे कोटि कोटि धिक्कार है

पीठ पर बार करते हो  

यही तुम्हारी हार है

हम सदभावी शांतिदूत

तुम हमें कमजोर आंकते हो

कायर बन चोर की मानद…

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Added by Dr.Ajay Khare on March 16, 2013 at 1:30pm — No Comments

दास्ताने होली

दास्ताने होली (होली के पावन पर्व पर जनहित में जारी)

होली के हुरियारों ने, मुझे पिला दी भंग

अंग अंग में छा गई, भंग की तरंग

गिरते पड़ते जैसे तैसे, वापिस घर मै आया

बाहर खड़े खजहे कुत्ते को, खूब गले लगाया

वो मुझे चाट रहा था, मै उसको चूम रहा था

मदहोश था यारो, मेरा सर घूम रहा था

रंगरंगीली छैलछबीली, वहाँ एक नार खड़ी थी

वो मुझे देखकर मुस्काई, मेरी उससे आँख लड़ी थी

उसकी कातिल मुस्कान ने, मेरे अरमानो को हवा दी

रोमांटिक हुआ…

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Added by Dr.Ajay Khare on March 11, 2013 at 11:00am — 4 Comments

कवि का प्यार

कवि का प्यार

जब एक कवि को हुआ, कवियत्री से प्यार

 दिलो जान से उस पर हुआ निसार

 कवि का एकतरफा दिल, गया मचल

   हास्य छोड़कर, वो लिखने लगा गजल

   गजल  लिखकर कवियत्री को पोस्ट करने लगा

 जिस कवि सम्मेलन मै कवियत्री हो, उसे होस्ट करने लगा

 कवि सम्मेलन मै कवियत्री आये

इस चक्कर मै उसने अनेक कवि सम्मेलन अपनी जेब से करवाये

कवि उस पर बुरी तरह मरने लगा

उसकी कविता पर कुछ ज्यादा ही बाह बाह करने लगा

उनका सानिध्य पाने की हर कोशिश…

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Added by Dr.Ajay Khare on March 6, 2013 at 11:55am — 11 Comments

बजट 2013

        बजट  2013

लो आ ही गया नवीन बजट

कुछ खिले चेहरे, कुछ गए लटक

शक्कर महंगी, पत्ती सस्ती

बजट हुआ  चुनावी कश्ती

गाड़ी लेना है आसान

बढ़ा दिए पेट्रोल के दाम  

मँहगा हुआ रेल सफ़र

महगाई से झुकी कमर

चढ़ा सीमेंट उतरा लोहा

मँहगा हो गया कोकोकोला

शून्य व्याज पर मिलेगा लौन

सबके हाथ मै होगा फोन

सस्ती गैस महँगा राशन

बचा रहे अपना…

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Added by Dr.Ajay Khare on March 1, 2013 at 3:30pm — 4 Comments

कटोरा

कटोरा

शादी मै लड़के के पिता ने दिखाया तेज,

माँगा भारी भरकम दहेज़,

गाड़ी एल इ डी सोना चाँदी की सूची थमाई,

डायमंड रिंग से होगी सगाई,

लड़की को ये बात न हुई गवारा,

चढ़ गया उसका पारा,

दहेज़ की बात ने उसको झकझोरा,

उसने लड़के के बाप को थमाया कटोरा,

कृपया रुखसत हों,,

इसी में समझदारी

आप रिश्ते योग्य नहीं,,

आप है भिखारी 

Dr.Ajay.Khare Aahat

Added by Dr.Ajay Khare on February 23, 2013 at 1:30pm — 9 Comments

दलाली

दलाली 

जब अफसर के बेटे की एक लड़की से आँख लड़ गई,  

आँखों के जरिये वो दिल मे उतर गई, 

नाम पूछने पर लड़की ने रिश्वत बताया,

लड़के को ठंड मे भी पसीना आया,

हाथ जोड़कर लड़का…

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Added by Dr.Ajay Khare on February 20, 2013 at 3:00pm — 6 Comments

सॉहब गान

सॉहब गान (जन हित मे जारी)

सर आप महान है

हम आपकी संतान है

आप हमारे राजा राम

हम आपके हनुमान है

सर आप महान है

आपके अधीनस्थ है यही अभिमान है

खुफिया है आपके, आपके ही कान है

आपकी खुराक का हमे पूरा घ्यान है

आप हमारे सेनापति हम आपके जवान है

सर आप महान है

आपके के कारण कार्यालय का नाम है

आपकी कार्यशैली का सब करते गुणगान है

बड़े बड़ों नेताओं से आपकी…

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Added by Dr.Ajay Khare on February 12, 2013 at 12:30pm — 9 Comments

लोकायुक्त का छापा

लोकायुक्त का छापा

नाम से ज़्यादा अहम, होता कवियों का उपनाम

उपनाम कवियों को देते,एक नई पहचान

सलिल, सरल, प्यासा, घायल, आहत, अटल, अचल

एक कवि ने नाम में जोड़ा, कवि करोड़ीमल

कवि करोड़ीमल थे फक्कड़ और बिंदास

पैसा रुपया धन दौलत न…

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Added by Dr.Ajay Khare on February 8, 2013 at 12:30pm — 7 Comments

तू तू मैं मैं

             तू तू मैं मैं 

पति पत्नीं में होता प्यार वेसुमार 

प्यार ही प्यार में होती तकरार

तकरार से संबंधों में आता निखार

तकरार से धुल जाता दिल का गुबार

प्राय: पति सदैव रहता खामोश

बस यदा कदा ही जताता आक्रोश

आपके कारण जिन्दगी मेरी नाश हो गई

हर बक्त तुम चुभने वाली फाँस हो गई

पल पल जलाती हो तुम मेरा खून

नहीं रहा जीवन में चैनोंसुकून

 खुशहाल जिन्दगी उदास…

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Added by Dr.Ajay Khare on February 7, 2013 at 1:00pm — 8 Comments

छुट्टी की अर्जी

  • छुट्टी की अर्जी

उन्होंने अवकाश हेतु आवेदन पहुँचाया

अधिकारी का सर चकराया

लिखा था प्रार्थी की मां का स्वास्थ वेहद नाजुक है

स्थिति अत्यंत गंभीर है

कोई रिस्पांस नहीं दे रही है

बस अंतिम सांसे ले रही है

त्याग दिया हे जल अन्न

बिलकुल हे मरणासन्न

चिकित्सकों के सारे प्रयास व्यर्थ है

अतः हम आगामी पांच दिवस कार्यालय आने में असमर्थ है

अधिकारी ने उनके अवकाश का रिकॉर्ड खुलवाया

व बिगत दो बर्षों में उनकी दो माताओं को मृत…

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Added by Dr.Ajay Khare on February 4, 2013 at 1:00pm — 3 Comments

बधू चाहिए,

बधू चाहिए, बधू चाहिए

अपने लल्ला के लिए एक बधू चाहिए

सुंदर सुशील पढ़ी लिखी गृह कार्य में दक्ष

सीता गीता रीता या मधु चाहिए

दहेज़ चाहिए न दान चाहिए

आपका प्यार व सम्मान चाहिए

लल्ला हमारा है गुणों की खान

देखने में लगता है सलमान खान

बी ई की पढ़ाई करी है 

हमने लाखों में फीस भरी है 

अच्छे पैकेज का वो कर रहा वेट

शादी में…

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Added by Dr.Ajay Khare on January 30, 2013 at 11:00pm — 8 Comments

बिछोह

बिछोह

कभीसोचा न था जो हुआ

कल्पना से परे

ये तुमने किया

यकीन नहीं

होगा भी क्यों

तुम ही तो थी मेरा बिश्वास

दिल के सबसे पास

सांसो में वास

सिर्फ तुम्हारा अहसास

बक्त जो गुजारा हमने

देखे थे सपने

सव नेस्तनाबूद

ख़त्म मेरा बजूद

कहा था तुमने में तुम बनेगें हम

किन्तु सब ख़तम

जरुर छीड़ पड़ी तुम्हारी स्मरण शक्ति

मेरा प्यार भक्ति

तुम वेबफा हो जानता नहीं

 तुमने छल किया…

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Added by Dr.Ajay Khare on January 21, 2013 at 5:45pm — 6 Comments

हाथ मिलाते रहिये

दिल मिले या ना मिले हाथ मिलाते रहिये,

प्यार की रस्म को आगे बढ़ाते रहिये |



अंधेरों मे ही ना गुजर जाय जीवन का सफ़र,

प्यार की शमा को दिल मे जलाते रहिये |



रहता यूँ चमन मे बिजलियों के गिरने का डर,

चाहत के फूलों को दिल मे खिलाते रहिये |



रोने गाने मे हो ना जाएँ सारी उमर तमाम,

उलफत के जाम को खुद पीकर पिलाते रहिये |



चले है जब तो मिल ही जाएगी मंज़िल हमको

अलबिदा कहते हुए हाथ हिलाते रहिये |

  • Dr.Ajay Khare…
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Added by Dr.Ajay Khare on January 10, 2013 at 2:30pm — 3 Comments

नूतन बर्ष

       नूतन बर्ष

आओ करें अमृत मंथन

जीवन के संघर्ष मे

दिल मे कुछ संकल्प ले

इस नूतन वर्ष में

सोचें सदा वतन हित में

देशभक्ति हो मन चित में

 परस्पर सदभाव हो

विकाश से लगाव हो

देश को खुशहाल बनाएँ

भ्रष्टाचार दूर भगाएँ

 खुशियों से भरा हो दामन

फिंजा देश की हो मनभावन

प्रगतिशील बढ़ चले कारवाँ

निकृष्ट से उत्कर्ष में

कल्याणकारी बयार बहे

इस नूतन बर्ष   में

 Dr.Ajay Khare Aahat

 

Added by Dr.Ajay Khare on December 28, 2012 at 12:29pm — 4 Comments

फुसलाने निकले

फुसलाने निकले

हम जिनको समझाने निकले
वो हमसे भी सयाने निकले

अनजाना समझा था जिनको
सब जाने पहचाने निकले

चेहरों पर लेकर खुशी
दर्द को छिपाने निकले

जिनको हमदम मान लिया था
दुश्मन वही पुराने निकले

जब पीने की दिल मे ठानी
बंद सभी मयखाने निकले

स्वांग ग़रीबी का करते थे
उनके घर तहख़ाने निकले

अब चुनाव जब सर पे आया
तो लोंगो को फुसलाने निकले

Dr. Ajay Khare Aahat

Added by Dr.Ajay Khare on December 24, 2012 at 12:00pm — 11 Comments

सब बिकाऊ हे

सब बिकाऊ हे





बाज़ार में आज सब बिक रहा है 

होता हे कुछ और कुछ दिख रहा है

दाम हो तो बोली लगाओ चाँद की

आसमान भी शर्म से अब झुक रहा है

बाज़ार में आज--------------



ईमान बिक रहा हे जमीर बिक रहा है

मजहव के नाम पर दाँव फिक रहा है

सम्मान की तो सरेआम होती नीलामी

सदभाव बहा देती सम्प्रदायिकता की सुनामी

बाजारू दलाल फलफूल रहा है

बाज़ार में आज-----------



बदन बिक रहा हे सदन बिक रहा है

लोकतंत्र की नई परिभाषा लिख रहा…

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Added by Dr.Ajay Khare on December 19, 2012 at 12:00pm — 2 Comments

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