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पत्नी चालीसा

जय जय जय पत्नी महरानी

महिमा आपकी किसी ने न जानी

जबसे घर में व्याह के आई

मची हुई हे खीचातानी

जय जय जय पत्नी महरानी

सास ससुर भये भयभीत

देवर ननद से जुडी न प्रीत

घर की बन बैठी तुम आका

फहरा दी हे विजय पताका

भोली भली दिखती थी आप

                                               निकली बहुत सायानी -------

  जय जय जय पत्नी महरानी

बक्त बेबक्त आपका डसना

भूल गए हम खुलकर हँसना

आजदी में लग गया बट्टा

बांध लिया गले में पट्टा

                    नतमस्तक हुए हम, करें आप मनमानी

जय जय जय पत्नी महरानी

हर दम आपका भय सताये

सपने में भी हमें डराये

घर में कभी चेन न पाए

शादी करके हम पछताये

               खुस थे हम शादी करके, पर ये तो हे कुर्बानी

जय जय जय पत्नी महरानी

हरदम आपके हुक्म बजाएं

फिर भी नाकारा कहलायें

तत्पर रहे खिदमत में आपकी

फिर भी आपको जीत न पायें

जोरू के गुलाम हुए हम

हो गए पानी पानी

जय जय जय पत्नी महरानी

Dr.Ajay Khare Aahat

             

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Comment

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Comment by श्रीराम on December 18, 2012 at 12:15pm

so nice.......thanks

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 18, 2012 at 11:00am

मधुर हास्य बिखेरते इस गीत पर सादर  बधाई स्वीकारें आद. अजय जी.

Comment by Dr.Ajay Khare on December 11, 2012 at 4:45pm

आदरणीय लाक्स्मन जी आपके आदेश का पालन करने की कोशिश करूँगा बस आप इसी तरह होसला अफजाई करते रहे 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 11, 2012 at 4:13pm
अच्छी हास्य रचना बधाई डॉ खरे जी, अब सोचे इस से उलट  और लिखे प्रेम चालीसा -

जब से जयजय गान हुआ एक का 

बेडा गर्क हो गया  इस समाज का ।
जय जय तो हो, जो है जीवन संगिनी  
वह है अब तुम्हारी अभिन्न अंगिनी ।
एक दूजे को समझो अब भला इसीमे 
राधा संग प्रीत लगाओ भाल इसीमे में ।
Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on December 11, 2012 at 1:29pm

जय हो 

बधाई 

Comment by Dr.Ajay Khare on December 11, 2012 at 11:36am

jawahar lal ji  thanks for liking my rachna

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on December 11, 2012 at 4:40am

जोरू के गुलाम हुए हम

हो गए पानी पानी

जय जय जय पत्नी महरानी

अच्छी हास्य रचना!

कृपया ध्यान दे...

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