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जीने की बात करता हूँ

जीने की बात करता हूँ

मै हर इंसान से जीने की बात करता हूँ

औरों के गम पीने की बात करता हूँ

चिंदी ,चिंदी हुई है, जो जीवन की किताब

हर चिंदी को सीने की बात करता हूँ

बचा जो डूबने से, उसे खुदाहाफिज

डूबे भंवर मै, सफीने की बात करता हूँ

दौलत की चमक से मचल रही दुनिया

मै बिन तराशे नगीने की बात करता हूँ

हुए शहीदे-बतन जो मिटाकर अपनी हस्ती

मै उनके खून पसीने की बात करता हूँ

जिन्दगी अपनी कटी बे हिसाब बे तरतीव

औरों से मै करीने की बात करता हूँ

Dr.Ajay Khare Aahat

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Comment by Vindu Babu on May 2, 2013 at 9:33am
सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on May 1, 2013 at 6:25pm

आ० डॉ० अजय खरे जी

आपकी यह अभिव्यक्ति गज़ल विधा के काफी करीब है.. ज़रा से प्रयास से इसे सुन्दर गज़ल रूप मिल सकता है.

अभिव्यक्ति के लिए बधाई .सादर.

Comment by Dr.Ajay Khare on May 1, 2013 at 4:32pm

ji raktale ji jha sahib sadhubaad

Comment by Ashok Kumar Raktale on May 1, 2013 at 9:00am

बहुत विश्वास और जोश से लबरेज रचना, बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई स्वीकारें. आदरणीय डाक्टर साहब. मैंने पहले भी इस रचना पर प्रतिक्रिया दी थी किन्तु मुझे यहाँ नहीं दिख रही है. 

Comment by राजेश 'मृदु' on April 30, 2013 at 2:21pm

बचा जो डूबने से, उसे खुदाहाफिज

डूबे भंवर मै, सफीने की बात करता हूँ

बहुत ही खूबसूरत अभिव्‍यक्ति, सादर

Comment by Dr.Ajay Khare on April 30, 2013 at 1:13pm

sabhi adarniy ko sadhubaad

Comment by बसंत नेमा on April 30, 2013 at 11:25am

सुन्दर  बहुत खूब

... बधाई 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on April 30, 2013 at 9:53am

आपकी धनात्मक सोच के नमन डॉ अजय खरे जी, प्रस्तुति के लिए बधाई 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on April 30, 2013 at 8:58am

आ0 अजय जी, अति सुन्दर। ’जिन्दगी अपनी कटी बे हिसाब बे तरतीव
औरों से मै करीने की बात करता हूँ।।’ बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें। सादर,

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