For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Manoj kumar Ahsaas's Blog – April 2016 Archive (2)

माँ पर एक ग़ज़ल.....मनोज अहसास

121-22 121-22 121-22 121-22



ख़ुशी में तू है,है ग़म में तू ही,नज़र में तू, धड़कनों में तू है ।

मैं तेरे दामन का फूल हूँ,माँ मेरी रगों में तेरी ही बू है ।।



हरेक लम्हा सफ़र का मेरे ,भरा हुआ है उदासियों से ।

ये तेरी आँखों की रौशनी है, जो मुझमे चलने की आरज़ू है ।।



है तेरे क़दमों के नीचे जन्नत, ज़माना करता तेरी इबादत ।

तेरे ही रुतबे का देख चर्चा, माँ सारे आलम में चार सू है ।।



तमाम है रौनके जहाँ में ,जो बेकरारी नज़र में भर दें ।

मगर जो खाता है…

Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on April 25, 2016 at 3:00pm — 9 Comments

ग़ज़ल मनोज अहसास(इस्लाह के लिए)

221 2121 1221 212



बेचैनियों के रंग सवालो में भर गये

मंज़िल से पूछता हूँ कि रस्ते किधर गये



दिल को निचोड़ा इतना कि अहसास मर गये

खुद को बिगाड़ कर तुझे हम पार कर गये



मुझको उदास देखा जो मिलने के बाद भी

वो अपने दिल का दर्द बताने से डर गये



पूनम की शब का चाँद जो खिड़की पे आ गया

कमरे में मेरे यादों के गेसू बिखर गये



साहिल की कैद में कहीं जलती है इक नदी

मेरे ख्याल रेत के दरिया में मर गये



वीरानियों को अपना मुकद्दर समझ… Continue

Added by Manoj kumar Ahsaas on April 5, 2016 at 11:05am — 21 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"गीत उसने ग़म के ही हमको गवाए उम्रभर प्यार में जिसको हसीं नग़्मा समझ बैठे थे हम | आदरणीय अरमान जी बहुत…"
8 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
""ओ बी ओ लाइव तरही मुशाइर:" अंक-116 को सफ़ल बनाने के लिए सभी ग़ज़लकारों और पाठकों का हार्दिक…"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी, बहुत बहुत शुक्रिया नाहक जी"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया राजेश कुमारी जी"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया शुक्ला जी"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया अरमान जी "
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी ,शुक्रिया लक्ष्मण जी"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"शुक्रिया शहीद जी ,आपको भी शिवरात्रि की बहुत बहुत बधाई"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"जी शुक्रिया जनाब"
8 hours ago
munish tanha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब "
8 hours ago
रवि भसीन 'शाहिद' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"आदरणीय मुनीश तन्हा साहब, आपकी दाद और नवाज़िश का बहुत शुक्रिया।"
9 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-116
"ओबीओ ज़िंदाबाद ।"
9 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service