For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan"'s Blog – January 2018 Archive (6)

लिप्सा के परित्याग से खिलता आत्म प्रसून

दोहा/ ग़ज़ल

चाहत के तूफान में, उजड़े चैन सुकून

चिंता में जल कर हुआ, भस्म खुदी का खून

गीता में लिक्खा गया, राहत का मजमून

लिप्सा के परित्याग से, खिलता आत्म-प्रसून

संग्रह का जो रोग है, बढ़ता प्रतिपल दून

लोभ अग्नि में हे! मनुज, यूँ खुद को मत भून

सुख का एक उपाय बस, इच्छा करिए न्यून

बाकी मर्ज़ी आपकी, खटिए चारो जून

मनस वेदना के लिए, यह बढ़िया माजून

सो पंकज नें कर लिया, लेखन एक जुनून

मौलिक…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 16, 2018 at 11:23am — 11 Comments

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

तुम्हारे दीद की ख़ाहिश अभी अधूरी है

इसीलिए तो निगाहें खुली ही छोड़ी है

तमाम ख़ाब हैं आँखों में तेरी ही ख़ातिर

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है

किसी अज़ीज़ नें आख़िर मुझे सिखाया तो

यूँ रोज़ रोज़ ग़ज़ल लिखना बेवकूफ़ी है

जहाँ के लोगों के दुःख दर्द का गरल अपने

उतारा सीने में तब ही कलम ये पकड़ी है

बताऊँ कैसे उन्हें शायरी जुनून हुई

नसों में दौड़ती पंकज के, ये बीमारी है

मौलिक…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 11, 2018 at 5:41pm — 7 Comments

जाने सूरज कब निकले है वक्त अभी रुसवाई का------गज़ल

22 22 22 22 22 22 22 2

नैन में रैन गँवाए जाऊँ, वक्त पहाड़ जुदाई का

जाने सूरज कब निकले, है वक्त अभी रुसवाई का

उनको कोई ग़रज़ नहीं जो पूछें हाल हमारा भी

कोई दूजी वज्ह नहीं, परिणाम है कान भराई का…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 9, 2018 at 4:30pm — 14 Comments

प्रतिबंधित मुलाकात हुई है-ग़ज़ल

22 22 22 22

उनसे मेरी बात हुई है
प्रतिबंधित मुलाक़ात हुई है

सारे स्वप्न तरल हैं मेरे
देखो तो बरसात हुई है

स्याही बन कर भस्म्है बिखरी
यूँ न अधेरी रात हुई है

मन खुद में ही खोज खुदी से
शांति कहाँ, आयात हुई है

दिल वो जीते दर्द मग़र हम
मत समझो बस मात हुई है

मौलिक अप्रकाशित

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 8, 2018 at 9:00pm — 19 Comments

लजाते हो क्यूँ तुम-गीत

जो हमसे मोहब्बत नहीं है तो हमको

बताओ कि हमसे लजाते हो क्यूँ तुम?

निगाहें मिला कर निगाहों को अपनी

झुकाते हो हमसे छिपाते हो क्यूँ तुम?

कभी फेरना पत्तियों पर उँगलियाँ,

कभी फूल की पंखुड़ी पर मचलना

अचानक सजावट की झाड़ी को अपनी

हथेली से छूते हुए आगे बढ़ना

ये शोखी ये मस्ती दिखाते हो क्यूँ…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 4, 2018 at 8:00am — 8 Comments

ग़ज़ल - घाट पर सोया मिलूँगा ये बता देता हूँ मैं

2122 2122 2122 212

आज अपना सारा ईगो ही जला देता हूँ मैं

बर्फ़ रिश्तों पर जमी उसको हटा देता हूँ मैं

मेरे होने की घुटन तुमको न हो महसूस अब

ज़िन्दगी खोने का खुद को हौसला देता हूँ मैं

नाम दूँ बदनामियाँ दूँ, मेरे वश में है नहीं

सो मेरे होठों को चुप रहना सिखा देता हूँ मैं

तेरे चहरे पर शिकन संकोच अब आए नहीं

इसलिए सौगात में अब फ़ासला देता हूँ मैं

कुछ नहीं बस हार इक ला कर चढ़ा…

Continue

Added by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 2, 2018 at 9:00am — 23 Comments

Monthly Archives

2019

2018

2017

2016

2015

1999

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

विनय कुमार posted a blog post

व्यस्तता- लघुकथा

"अब गांव चलें बहुत दिन बिता लिए यहाँ", शोभाराम ने जब पत्नी ललिता से कहा तो जैसे उनके मुंह की बात ही…See More
22 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आ डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी"
22 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"इस उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया आ नीता कसार जी"
22 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय Dr. Vijai Shanker जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का तहे दिल से शुक्रिया।"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post क्षणिकाएँ ....
"आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से आभार।"
yesterday
Dr. Vijai Shanker commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी , हिंदी भाषा की स्वयं अपनों के द्वारा उपेक्षा को बहुत ही सरल शब्दों चित्रित…"
yesterday
Dr. Vijai Shanker posted a blog post

क्षणिकाएं —डॉo विजय शंकर

एक नेता ने दूसरे को धोया , बदले में उसने उसे धो दिया। छवि दोनों की साफ़ हो गई।।.......1.मातृ-भाषा…See More
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :

हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :फल फूल रही है हिंदी के लिबास में आज भी अंग्रेज़ीवर्णमाला का ज्ञान नहीं…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"अपने खोए हुए को खोजती परखती सिकुड़ती इस व्यथित अचेत असहनीय अवस्था में मानों किराय का अस्तित्व लिए…"
yesterday
डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव posted a discussion

ओबीओ लखनऊ चैप्टर की साहित्य संध्या माह अगस्त 2019 – एक प्रतिवेदन   :: डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव

 24 अगस्त 2019,भाद्रपद अष्टमी दिन शनिवार,बहुत से लोगों ने इस दिन कृष्ण जन्मोत्सव मनाया और उसी…See More
yesterday
Gajendra Dwivedi "Girish" commented on Admin's page Tool Box
"शीर्षक : नमन वीरों को हृदय शूल को और बढ़ाकर, कैसे शमन कर पाउँगा! अपने ही प्रत्यक्ष खड़े हों, कैसे…"
Monday
Gajendra Dwivedi "Girish" updated their profile
Monday

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service