For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है-ग़ज़ल

1212 1122 1212 22

तुम्हारे दीद की ख़ाहिश अभी अधूरी है

इसीलिए तो निगाहें खुली ही छोड़ी है

तमाम ख़ाब हैं आँखों में तेरी ही ख़ातिर

बुलाऊँ नींद, तेरा आना अब ज़रूरी है

किसी अज़ीज़ नें आख़िर मुझे सिखाया तो

यूँ रोज़ रोज़ ग़ज़ल लिखना बेवकूफ़ी है

जहाँ के लोगों के दुःख दर्द का गरल अपने

उतारा सीने में तब ही कलम ये पकड़ी है

बताऊँ कैसे उन्हें शायरी जुनून हुई

नसों में दौड़ती पंकज के, ये बीमारी है

मौलिक अप्रकाशित

Views: 61

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 16, 2018 at 11:31am

आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत आभार

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 16, 2018 at 7:04am

हार्दिक बधाई ।

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 13, 2018 at 5:47pm

आदरणीय अजय जी आपकी बहुत बहुत शुक्रिया, ऐसी गल्ती मुझसे अक्सर हो रही,  मेरी लापरवाही

Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on January 13, 2018 at 5:46pm
आदरणीय बाऊजी सादर प्रणाम, मत्ले के सानी मिसरे में अभी कुछ अच्छा सूझ नहीं रहा, कपके सहयोग की ज़रूरत है।

ददूसरे शेर की कहन अभी सही करने की कोशिश करता हूँ।
Comment by Samar kabeer on January 13, 2018 at 5:32pm

सत्य वचन ।

Comment by Ajay Tiwari on January 13, 2018 at 5:20pm

आदरणीय पंकज जी, अच्छे अशआर हुए है, हार्दिक बधाई.

'दीद' स्त्रीलिंग है, इस लिए इस के साथ 'तुम्हारी' का प्रयोग बेहतर होगा.

सादर    

Comment by Samar kabeer on January 12, 2018 at 11:19am

अज़ीज़म पंकज कुमार मिश्रा आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

मतले के सानी मिसरे में 'निगाहें' शब्द बहुवचन है और रदीफ़ एक वचन में देखियेग ।

दूसरे शैर में क्या कहना चाहते हैं?भाव स्पष्ट नहीं ।

तीसरे शैर में ये ग़लत मशविरा किसने दे दिया आपको ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सतविन्द्र कुमार commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"वाहः वाहः बहुत खूब अशआर हुए हैं। सादर बधाई"
4 hours ago
SALIM RAZA REWA commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"शुक्रिया मोहित भाई."
4 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत बढ़िया सामयिक पेशकश। आपकी लेखनी का यह रूप देख कर बहुत ख़ुशी हासिल हुई। तहे दिल से बहुत-बहुत…"
4 hours ago
Mohit mishra (mukt) commented on SALIM RAZA REWA's blog post हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा
"आदरणीय सलीम जी उम्दा ग़ज़ल, बहुत बहुत मुबारकबाद "
5 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"रचना पर प्रतिक्रिया देकर मान बढ़ाने का बहुत-बहुत आभार आदरणीया राजेश कुमारी जी ।"
5 hours ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"धन्यवाद एवं आभार आदरणीय विश्वकर्मा साहब!!"
5 hours ago
Mohammed Arif commented on Mohammed Arif's blog post कविता- बसंत
"बहुत-बहुत आभार आदरणीत नरेंद्र सिंह जी ।"
5 hours ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post तेरे नज़दीक ही हर वक़्त ....”संतोष”
"शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ साहब !!!"
5 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया- सलीम रज़ा

221 2121 1221 212हमने हरिक उम्मीद का पुतला जला दिया दुश्वारियों को पांव के नीचे दबा दिया-मेरी तमाम…See More
5 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय राजेश कुमारी साहिबा जी।"
6 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on TEJ VEER SINGH's blog post बसंत - लघुकथा –
"हार्दिक आभार आदरणीय शेख उस्मानी साहब जी।"
6 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...धूल की परतें-बृजेश कुमार 'ब्रज
"जनाब ब्रजेश कुमार साहिब , कुहरा और कुहर दोनो शब्द हिन्दी के हैं , कोहरा नाम का कोई शब्द डिक्सनरी…"
6 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service