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Er. Ganesh Jee "Bagi"'s Blog (125)

लघु कथा : ममता

                            चार दिन पहले ही तो सिन्हा साहब की नई चमचमाती कार आई थी, और आज सुबह घर में कोलाहल मचा हुआ है, पूछने पर पता चला कि सिन्हा जी के  बड़े लड़के  रवि  नें, गाड़ी सीखने के दौरान स्कूल जाते हुए एक विद्यार्थी पर गाड़ी चढ़ा दी थी | थोड़ी देर में रवि का छोटा भाई पिंकू आते हुए दिखा, सभी लोग उससे दुर्घटना के बाबत पूछताक्ष करने लगे |
                            सिन्हा जी नें घबराकर पूछा  "बेटा, रवि कैसा है ज्यादा चोट तो नहीं आई ?" नहीं पापा…
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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 6, 2012 at 10:30am — 25 Comments

लघुकथा :- चिंगारी

लघुकथा :- चिंगारी …

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 19, 2012 at 1:00pm — 53 Comments

लघु कथा :- गिद्ध

लघु कथा :- गिद्ध…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 25, 2012 at 11:46am — 42 Comments

लघुकथा : कवच

पूरे मोहल्ले में यह चर्चा थी कि गुड़िया को एड्स की बीमारी है | दरअसल उसका पति एक सरकारी मुलाज़िम था जो कि सिर्फ़ २५ वर्ष की आयु में ही अचानक किसी रहस्यमयी बीमारी का शिकार होकर दुनिया छोड़ गया था | एड्स पर काम कर रही एक स्वयंसेवी संस्था के कार्यकर्ता बहुत समझा-बुझा कर गुड़िया को एड्स की जाँच करवाने अपने साथ ले गए थे | गुड़िया को जो सरकारी पेंशन मिलती थी उसी से किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही थी…
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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 15, 2012 at 8:00pm — 51 Comments

लघु कथा : हाथी के दांत

लघु कथा : हाथी के दांत 

बड़े बाबू आज अपेक्षाकृत कुछ जल्द ही कार्यालय आ गए और सभी सहकर्मियों को रामदीन दफ्तरी के असामयिक निधन की खबर सुना रहे थे. थोड़ी ही देर में सभी सहकर्मियों के साथ साहब के कक्ष में जाकर बड़े बाबू इस दुखद खबर की जानकारी देते है और शोक सभा आयोजित कर कार्यालय आज के लिए बंद करने की घोषणा हो जाती है | सभी कार्यालय कर्मी इस आसमयिक दुःख से व्यथित होकर अपने अपने घर चल पड़ते  है | बड़े बाबू…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 19, 2012 at 9:03pm — 68 Comments

दस छन्न पकैया

दस छन्न पकैया

(१)

छन्न पकैया छन्न पकैया, गाँव दिखा जो नेता,

बुढ़िया काकी पूछे - "का फिर चुनाव…
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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 22, 2012 at 1:30pm — 37 Comments

हाइगा : एक प्रयास

(चित्र गुगल से साभार)

हाइगा एक परिचय :- हाइगा साहित्य की जापानी विधा है जो १७ वी शताब्दी में शुरू की गई थी, हाइगा मूलतः दो जापानी शब्द से मिलकर बना है,

हाइगा = हाइ + गा ,

हाइ (हाइकु) = कविता ,

गा   = रंग चित्र या चित्रकला

अर्थात, हाइगा, हाइकु  और रंग चित्र के संयोजन से सृजित किया जाता है, उस समय रंग…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 4, 2011 at 9:00pm — 25 Comments

अन्ना आन्दोलन कार्टूनिष्ट पवन की नजर से

साभार :- हिंदुस्तान /…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 21, 2011 at 10:46am — 10 Comments

अपने मित्रों को ओ बी ओ सदस्यता हेतु कैसे आमंत्रित करें ?

साथियों,

कई मित्रों का प्रश्न  है कि "मैं अपने मित्रों को जो जीमेल, याहू , हॉटमेल आदि में है उनको कैसे ओ बी ओ पर आमंत्रित करूँ ?

इसका सरल उपाय ओ बी ओ पर है, मैं चित्र (स्क्रीन शोट) के माध्यम से बताना चाहता हूँ , उम्मीद है प्रश्न का उत्तर मिल जायेगा, उसके पश्चात् भी यदि कुछ प्रश्न उठ रहे हो तो नीचे कमेंट्स बॉक्स में लिखे ....मैं हूँ ना :-)

 

 …

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 20, 2011 at 5:00pm — 4 Comments

ब्लॉग / रचना कैसे पोस्ट करें ...

साथियों ! नये सदस्यों के सहयोग हेतु ब्लॉग में रचना कैसे पोस्ट करे चित्र के माध्यम से समझाया गया है | यदि पुनः कोई प्रश्न इस सम्बन्ध में हो तो नीचे दिए गए टिप्पणी बॉक्स मे लिखकर पूछा जा सकता है |…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 20, 2011 at 7:00pm — 4 Comments

आपके ओपन बुक्स ऑनलाइन की चर्चा अब अखबार में भी

आदरणीय साथियों,

 

आप सभी का ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के प्रति समर्पण और विश्वास अब मिडिया की नज़रों में भी आने लगा है, लखनऊ से प्रकाशित प्रसिद्ध हिंदी समाचार पत्र जन सन्देश टाइम्स ने ओ बी ओ के बारे में एक बड़ा सा Article छापा है | आप सभी को बधाई |…



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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 1, 2011 at 12:00am — 20 Comments

ग़ज़ल : कुछ कड़वा सा एहसास

सभी रिश्ते है मतलब के ये मानो या न मानो तुम,
है मिलते प्यार में धोखे ये मानो या न मानो तुम,
 
रहूँ मैं राम भी बनके अगर हो भरत सा भाई,
है माता कैकई घर मे ये मानो या न मानो तुम,      
 
यकीं…
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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on May 25, 2011 at 5:00pm — 83 Comments

बलिया मे छठ पूजा, बागी की नजर से ....

सर्व शक्तिमान एवं प्रत्यक्ष भगवान सूर्य के उपासना का पर्व छठ पिछले दिनों उत्तर भारत सहित पूरे भारत मे काफी श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया, बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे भी छठ का पवित्र त्यौहार धूम धाम से मनाया गया |

इस त्यौहार की खास बात यह है कि छठ पूजा मे प्रथम अर्ध्य डूबते हुये सूर्य को दिया जाता है तथा दूसरा अर्ध्य उगते हुये सूर्य का किया जाता है, यह परंपरा एक बहुत ही प्रसिद्ध कहावत कि " उगते सूर्य को सभी सलाम करते है तथा डूबते… Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 16, 2010 at 9:30am — 21 Comments

"OBO लाइव महा इवेंट" मे अपनी रचना कैसे पोस्ट करे ?

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के नये सदस्यों को दिक्कत हो रही है कि "OBO लाइव महा इवेंट" मे अपनी रचना कैसे पोस्ट करे ?

मैं कुछ स्क्रीन शाट के सहयोग से बताना चाहूँगा ...................

१- सबसे पहले मुख्य पृष्ठ से फोरम से "OBO लाइव महा इवेंट" को क्लिक करे ........

२- जो बॉक्स खुला उसमे अपनी रचना लिख पोस्ट करे

३- यदि किसी की रचना के ऊपर टिप्पणी देनी हो तो नीचे दिये स्क्रीन शाट को देखे ...…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 1, 2010 at 5:58pm — 1 Comment

कविता : बारिश के रंग

हाल- ए- दिल ऊंचे महलों से पूछो जरा,

मस्तियाँ बादलों की कैसी उन्हे लगती हैं,



जब सावन की पहली पड़ती फुहार,

धरा ख़ुशी से सोंधी खुशबू बिखेरती,

बच्चे उछलते कूदते मचलते खेलते,

चेहरे किसानो के उम्मीदों से चमकते,



हाल- ए- दिल झोपड़ियो से पूछो जरा,

आंशु बन बारिश छपरों से टपकती है,



खूब बारिश हुई भरी नदिया और ताल ,

मचलती तितलियाँ भी आँचल संभाल,

हवाओं को भी देखो चलती मदभरी,

दीवाना बनाने को हमें हठ पर अड़ी,



हाल- ए- दिल उन… Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2010 at 2:30pm — 32 Comments

मेरी दूसरी ग़ज़ल

दो सीधे से सवाल का जवाब दोस्तों ,

क्यों पी रही है मुझको ये शराब दोस्तों ,



मैने शराब पी थी गम भुलाने के लिए

बढ़ने लगी है क्यों मेरी अजाब दोस्तों,



माना कि पी गया मै जश्ने यार मे बहुत ,

डर है जिगर न दे कहीं जवाब दोस्तों ,



इतनी ही गर हसीं है ये प्याले की महेबुबा,

फिर क्यों मिला रहे सुरा में आब दोस्तों,



मैने जवानी जाम संग बितायी शान से,

चर्चा हुई बुढ़ापे की ख़राब दोस्तों ,



कितनी ही मिन्नतों के बाद जिंदगी मिली,

ना… Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 7, 2010 at 1:00am — 27 Comments

सदन खड़ी द्रोपदी बनकर...

कौरव पांडव मिल चीर खीचते ,

सदन खड़ी बेचारी द्रोपदी बनकर,

हाथ जोड़े लुट रही थी वो अबला,

कृष्ण ना दिखे किसी के अन्दर ,



चुनाव का चौपड़ है बिछने वाला ,

शकुनी चलेगा चाल,पासे फेककर,

खेलेंगे खेल दुर्योधन दुश्शाशन ,

होगा खड़ा शिखंडी भेष बदलकर,



हे!जनता जनार्दन अब तो जागो,

रक्षा करो कृष्ण तुम बनकर,

दिखाओ,तुम्हे भी आती है बचानी आबरू ,

"बागी" नहीं जीना शकुनी का पासा बनकर,…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 21, 2010 at 8:00pm — 22 Comments

मैं घबरा जाता हूँ...

मैं घबरा जाता हूँ यह सोच सोच कर ,
कैसे कोई गरीब अपना घर चलाता होगा,

सौ लाता है मजदूर पूरे दिन मर कर,
कैसे भर पेट दाल रोटी खा पाता होगा,

बीमार मर जायेगा दवा का दाम सुनकर,
हे! ईश्वर कैसे वो ईलाज कराता होगा,

मुर्दा डर जायेगा लकड़ी की दर सुनकर,
कैसे कोई मजलूम शव जलाता होगा ,

लगी है आग गंगा में महंगाई की "बागी",
कैसे कोई अधनंगा डुबकी लगाता होगा ,

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 17, 2010 at 3:00pm — 16 Comments

पहली ग़ज़ल

वो इक अलाव सा जिगर में लिए फिरते हैं ,

चिराग महल के झोपडी के खूँ से जलते हैं !



बंद भारत ने ठंडे कर दिए चूल्हे लाखों ,

है किस तरह की जंग रहनुमा जो लड़ते हैं



रोटियां सेंकते लाशों पे आपने लालच की,

ये कर्णधार मुझे तो जल्लाद लगते हैं !



वो ढूँढते है भगवान को मंदिर की ओट से,

हमारी आस्था ऐसी जो चक्की भी पूजते हैं !



अपना जाना जो उन्हें जान जाएगी "बागी"

वो ज़हरी नाग हैं जो आस्तीं में रहते है !



( मैं आदरणीय योगराज प्रभाकर जी ,… Continue

Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2010 at 11:30pm — 10 Comments

"बाल मजदूरी ठीक नहीं"

चाय पिला पिला कर ,

लोगो की सेवा वो करता रहा,

महज़ चार चाय की कीमत पर ,

मालिक उसको छलता रहा,

भूखी अंतड़िया ,

क्या जाने चाय की तलब ,

दो रोटियां, चोखे संग,

पाने को पेट जलता रहा ,

बैठे चायखाने मे

खादी पहने

कुछ उच्च शिक्षित लोगों के मध्य

"बाल मजदूरी…

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Added by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 12, 2010 at 3:00pm — 27 Comments

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